बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, नरेश यादव और संदीप यादव ने दलीलें पेश कीं।

वाराणसी। शहर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर देश के कई राज्यों के लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले 26 साइबर जालसाजों को अदालत से राहत मिल गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत दे दी है। इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ वाराणसी पुलिस ने पिछले दिनों सिगरा और लक्सा थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर किया था।

25-25 हजार के मुचलके पर रिहा करने का आदेश अदालत ने गिरफ्तार किए गए किशन झा, शुभम राय, नीतीश कुमार राय, पवन कुमार पाण्डेय, शुभम जायसवाल, ज्ञानेंद्र राय, सूर्यांश गुप्ता, चंदन पाण्डेय समेत सभी 26 आरोपियों को 25-25 हजार रुपए की दो जमानतें और उतनी ही रकम का बंधपत्र (बॉन्ड) दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, नरेश यादव और संदीप यादव ने दलीलें पेश कीं।

कैसे करते थे देशव्यापी ठगी? डीसीपी क्राइम सरवणन टी को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। यह गिरोह वाराणसी में बैठकर पूरे देश में, खासकर दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों में, अपना जाल बिछाए हुए था। ये शातिर अपराधी लोगों को शेयर मार्केट में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे।

इनका modus operandi बेहद चालाकी भरा था। ये लोगों को ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के टिप्स देने के नाम पर फर्जी वीडियो और गलत सलाह भेजते थे। फिर क्यूआर कोड और अन्य ऑनलाइन पेमेंट माध्यमों से मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे। गिरोह ‘एंजल’ जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में डीमैट अकाउंट खुलवाने के नाम पर भी लोगों को अपना शिकार बनाता था।

पुलिस की संयुक्त छापेमारी में हुए थे गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल के साथ सिगरा और लक्सा थाने की एक संयुक्त पुलिस टीम का गठन किया गया था। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दोनों थाना क्षेत्रों में चल रहे इन फर्जी कॉल सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की, जहां से कुल 26 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 54 मोबाइल फोन, कई लैपटॉप, भारी मात्रा में चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे। जांच में पता चला कि यह फ्रॉड कॉल सेंटर पिछले करीब दो साल से वाराणसी में संचालित हो रहा था और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इनके खिलाफ 57 से अधिक शिकायतें दर्ज थीं। यह गिरोह विशेष रूप से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लोगों को अपना निशाना बना रहा था।

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