वाराणसी: साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच, वाराणसी पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो फर्जी सिम बेचकर अपराधियों की मदद कर रहा था। साइबर सेल और चेतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने इस शख्स को तब पकड़ा जब वह भोले-भाले लोगों के नाम पर फर्जी सिम एक्टिवेट कर रहा था।
दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक वोडाफोन कंपनी के सेल्स एग्जीक्यूटिव प्रियेश गुप्ता ने चेतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। प्रियेश ने बताया कि उनका एक सब-एजेंट अजय मौर्या कम पढ़े-लिखे लोगों को झांसा देकर उनके नाम पर फर्जी सिम बना रहा है। अजय इन लोगों को बताता था कि ‘नेटवर्क सर्वर खराब है’ और फिर उनके नाम से सिम एक्टिवेट कर लेता था। बाद में इन फर्जी सिम्स को वह महंगे दामों पर बेच देता था।
पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल के निर्देशन में, पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की। टीम ने अजय मौर्या को पिशाच मोचन के पास से रंगे हाथों पकड़ा। उसके पास से 117 सिम कार्ड बरामद हुए, जिनमें से 6 एक्टिवेटेड थे और बाकी एक्टिवेट होने बाकी थे। इसके अलावा, उसके पास से 4 मोबाइल फोन और 3060 रुपये नकद भी मिले।
अपराध का तरीका: भोले-भाले लोगों को निशाना – पुलिस की पूछताछ में अजय ने अपने काम करने का तरीका बताया। वह उन लोगों को चुनता था जो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और सिम लेने के लिए उसके पास आते थे। वह उन्हें बहकाकर उनके दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके फर्जी सिम बनाता था। इन फर्जी सिम्स को वह दिल्ली और अन्य राज्यों में साइबर अपराधियों को कूरियर या बस के माध्यम से भेजता था। इन सिम्स का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जाता था।
इस गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने टेलिकॉम कंपनी को भी अजय मौर्या का लाइसेंस रद्द करने के लिए सूचित किया है। अजय मौर्या, जिसकी उम्र करीब 32 साल है, का आपराधिक इतिहास भी है और उसके खिलाफ पहले भी ऐसे मामले दर्ज हो चुके हैं। इस कार्रवाई से साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है।
इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में साइबर सेल के उप-निरीक्षक कृष्ण कुमार जायसवाल और चेतगंज थाने की टीम ने अहम भूमिका निभाई। यह गिरफ्तारी दिखाती है कि कैसे छोटी-छोटी आपराधिक गतिविधियां बड़े साइबर अपराधों का आधार बनती हैं, और पुलिस की सतर्कता ही इन पर रोक लगा सकती है।




