थाना राजातालाब में दर्ज रंगदारी के अभियुक्त सुनील जायसवाल को राहत देने से उच्च न्यायालय ने किया इन्कार

पुलिस अब अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है और कर सकती है आगे की कानूनी कार्रवाई

वाराणसी। जनपद के थाना राजातालाब में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 161/2025 धारा 308 (2) बीएनएस के अभियुक्त सुनील जायसवाल के द्वारा उच्च न्यायालय में थाना राजातालाब में दर्ज उक्त एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया गया है। जिसमे उच्च न्यायालय के द्वारा अभियुक्त को राहत देने से इन्कार कर दिया गया है। बताते चले कि उक्त मुकदमें के वादी राजातालाब क्षेत्र के रहने वाले आभूषण व्यवसायी पंकज सेठ के द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसके सम्बन्ध में अभियुक्त के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में उक्त एफआईआर को चुनौती दी गई थी।

उक्त के सम्बन्ध में दोनो पक्षों की तर्कों व पत्रावलियों के निरीक्षण के बाद न्यायाधीश सलील कुमार राय व न्यायाधीश जफीर अहमद के द्वारा जो आदेश दिये गये वो इस प्रकार है:- याची के अधिवक्ता, राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता तथा प्रतिवादी संख्या 4 की ओर से अभिषेक कुमार सिंह को सुना गया।

वर्तमान याचिका प्रथम सूचना रिपोर्ट दिनांक 27.7.2025 केस क्राइम नं. 0161/2025, धारा 308(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023, थाना राजा तालाब, जनपद गोमती, पुलिस आयुक्त वाराणसी को चुनौती देने हेतु दायर की गई है। हमने उक्त एफ.आई.आर. का अवलोकन किया है, जो प्रथम दृष्टया अपराध की कमीशन को दर्शाती है। इसलिए, एफ.आई.आर. को निरस्त करने का अनुरोध सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयों के प्रकाश में स्वीकार्य नहीं है।

विशेष रूप से स्टेट ऑफ तेलंगाना बनाम हबीब अब्दुल्ला जेल्लानी, (2017) 2 एससीसी 779, नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य, (2021 एससीसी आनलाइन एससी 315), इनके अनुसार हम यह मत व्यक्त करते हैं कि इस स्तर पर किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, यह देखते हुए कि एफ.आई.आर. में उल्लिखित सभी अपराध अधिकतम सात वर्ष की सजा से दंडनीय हैं, इसलिए यदि याची की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है तो प्रतिवादी/प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41(1)(बी) एवं धारा 41-।/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 35(3) से 35(7) तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अरेश कुमार बनाम बिहार राज्य, (2014) 8 एससीसी 273 एवं इस न्यायालय द्वारा विमल कुमार एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य, (2021 (2) एसीआर 1147 में पारित आदेश दिनांक 28.01.2021 का कड़ाई से अनुपालन किया जाए।

उपरोक्त टिप्पणियों के साथ, यह रिट याचिका निस्तारित की जाती है।

उच्च न्यायालय ने अभियुक्त को राहत देने से इन्कार कर दिया है। यह निर्णय इस बात को दर्शाता है कि न्यायालय ने मामले की गंभीरता और अभियुक्त की संभावित संलिप्तता को देखते हुए यह फैसला लिया है। लेकिन जब अपराध गंभीर हो और पुलिस के पास ठोस सबूत हों, तो न्यायालय ऐसे मामलों में राहत देने से बचते हैं। इस इन्कार के बाद, पुलिस अब अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है और आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *