स्मार्ट सिटी कार्यालय में शिकायत, लेकिन कार्रवाई शून्य

वाराणसी। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर की भीड़भाड़ को कम करने और पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर भूमिगत पार्किंग बनाई गईं थीं। लेकिन अब यही पार्किंग लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। खासकर मैदागिन और बेनियाबाग की भूमिगत पार्किंगों में संचालकों की मनमानी और अव्यवस्था के चलते आम जनता को जेब ढीली करनी पड़ रही है।

मैदागिन पार्किंग के नए संचालक ने पुराने पासों को एक झटके में निरस्त कर दिया, जबकि बहुत से लोगों के पास अब भी वैध हैं और उनकी समयसीमा खत्म नहीं हुई है। संचालक का तर्क है कि उन्हें पिछली बार से अधिक रकम पर टेंडर मिला है, इसलिए पुराने पास मान्य नहीं हैं।

वहीं बेनियाबाग पार्किंग में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। पिछले साल जहाँ दोपहिया का मासिक पास 500 रुपये में बनता था, अब वही पास 700 रुपये में मिल रहा है। चार पहिया वाहनों का पास 4000 रुपये प्रति माह हो गया है। दूसरी ओर मैदागिन में दोपहिया का पास सीधे 1000 रुपये में बनाया जा रहा है और कार के लिए पास बन ही नहीं रहा।

जिन लोगों के पास वैध पास है, उन्हें भी पार्किंग शुल्क घंटों के हिसाब से देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यानी पासधारी भी अब सामान्य ग्राहकों की तरह शुल्क दें, नहीं तो पार्किंग न मिले। इससे साफ ज़ाहिर है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता की जेब पर सीधा हमला हो रहा है।

दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार और महामंत्री संजय कुमार सिंह ने इस अव्यवस्था पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि,

“दवा मंडी से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, ऐसे में व्यवसायियों को पार्किंग की सुविधा निःशुल्क मिलनी चाहिए। यह सुविधा देने के बजाय अब दोगुना वसूली की जा रही है।”

स्थानीय व्यापारियों और भुक्तभोगियों ने इस संबंध में स्मार्ट सिटी कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि स्मार्ट सिटी पार्किंग अब जन सुविधा नहीं बल्कि कमाई का जरिया बन चुकी है।

वाराणसी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक शहर में पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर यदि स्मार्ट सिटी में इतनी मनमानी और अव्यवस्था होगी, तो आमजन का भरोसा कैसे कायम रहेगा? ज़रूरत है कि प्रशासन इस विषय पर तुरंत ध्यान दे और एक एकीकृत और पारदर्शी नीति लागू करे, जिससे जनता को राहत मिल सके।

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