आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, आनंद तिवारी पंकज, नरेश यादव और संदीप यादव ने किशोर न्याय बोर्ड में अपना पक्ष रखा।

वाराणसी में एक अंडा विक्रेता पर जानलेवा हमले के मामले में एक बाल अपचारी (Juvenile) को बड़ी राहत मिली है। किशोर न्याय बोर्ड ने उसे जमानत दे दी है, जिसके बाद उसे उसके पिता के संरक्षण में रिहा करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ आरोपी की उम्र और परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।

क्या था पूरा मामला? यह घटना 27 जुलाई, 2025 की है। राजेंद्र पटेल नामक एक अंडा विक्रेता ने पुलिस को बताया कि उस दिन सुबह लगभग 11 बजे सुरेंद्र तिवारी का बेटा दीपक तिवारी उनके घर आया और उनसे मारपीट करने लगा। राजेंद्र के विरोध करने पर दीपक उन्हें जान से मारने की धमकी देकर चला गया।

शाम को जब राजेंद्र ने अपनी अंडे की दुकान खोली, तो सोनू तिवारी एक अन्य व्यक्ति के साथ उनकी दुकान पर आए और उन्हें गोली मारने की धमकी दी। इसके लगभग डेढ़ घंटे बाद, रात 8:30 बजे के करीब, एक चार पहिया वाहन से विनीत सिंह, दीपक तिवारी और कुछ अन्य अज्ञात लोग उनकी दुकान पर पहुंचे। उन्होंने राजेंद्र को निशाना बनाकर जान से मारने की नीयत से गोली चला दी।

इस मामले में, 28 जुलाई, 2025 को सिंधौरा थाने में दीपक तिवारी, सोनू तिवारी, विनीत सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

बाल अपचारी को मिली जमानत पुलिस की जांच के दौरान इस मामले में एक बाल अपचारी का नाम सामने आया, जिसे गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया था। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, आनंद तिवारी पंकज, नरेश यादव और संदीप यादव ने किशोर न्याय बोर्ड में अपना पक्ष रखा।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, बाल अपचारी को उसके पिता के संरक्षण में 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें और बंधपत्र (bond) देने पर रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले को प्रधान मजिस्ट्रेट सौरभ शुक्ला और सदस्यगण त्र्यंबक नाथ एवं आरती सेठ की पीठ ने सुनाया।

यह मामला दिखाता है कि कानूनी प्रक्रिया में किशोर न्याय (Juvenile Justice) के सिद्धांतों का पालन किया जाता है, जहाँ आरोपी की कम उम्र को ध्यान में रखकर उसे सुधार का मौका दिया जाता है।

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