वाराणसी: दहेज के लिए अपनी पत्नी को पीटने और परेशान करने के आरोप में फंसे पति और देवर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन, तृतीय) अजय प्रताप की अदालत ने पर्याप्त सबूत न मिलने पर पति सूरज प्रसाद यादव और उनके देवर संतोष कुमार यादव को बरी कर दिया।

यह मामला 13 मई 1999 का है, जब सीताराम यादव ने दशाश्वमेध थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी बेटी सोनी की शादी 16 फरवरी 1996 को सूरज प्रसाद यादव से हुई थी। सीताराम यादव ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही सूरज, उनके भाई संतोष और पिता मोती लाल यादव दहेज में रंगीन टीवी और स्कूटर की मांग को लेकर उनकी बेटी को परेशान करते थे और मारते-पीटते भी थे।

उन्होंने बताया कि 1998 में उनकी बेटी ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसके बाद ससुराल वालों ने मां-बेटी को घर से बाहर निकाल दिया। बाद में, कुछ समझाने-बुझाने पर वह अपनी बेटी को वापस ससुराल पहुंचा पाए। लेकिन कुछ समय बाद ही बेटी मायके लौट आई और बताया कि ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर उसे मारने-पीटने लगे थे और जलाने की कोशिश भी कर रहे थे, जिससे वह किसी तरह भागकर बच पाई।

हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों और सबूतों की पड़ताल के बाद पति और देवर के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हो पाए। कोर्ट ने दोनों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। इस मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव और संदीप यादव ने की। इसी बीच, ससुर मोती लाल यादव की मौत हो जाने की वजह से उनके खिलाफ चल रही सुनवाई को भी खत्म कर दिया गया।

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