बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और सहयोगी शादाब अहमद, आशुतोष पाठक, और संजय पटेल एडवोकेट ने पैरवी की।
वाराणसी। जहां एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की खबरें आम हैं, वहीं वाराणसी की एक अदालत से एक पूर्व पुलिस अधिकारी को बड़ी राहत मिली है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे अवकाश प्राप्त पुलिस क्षेत्राधिकारी कृष्ण सिंह बघेल को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) प्रथम अवधेश कुमार की अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है।

क्या है पूरा मामला? – देवरिया निवासी आरोपित कृष्ण सिंह बघेल पर आय से ज्ञात स्रोतों के मुकाबले 80.31% अधिक संपत्ति होने का आरोप था। यह मामला उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर 2012 में कोतवाली बलिया में दर्ज किया गया था।
जांच संगठन ने 1 नवंबर 1997 से 31 दिसंबर 2011 तक की अवधि की पड़ताल की। इस दौरान, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (अब सेवानिवृत्त) कृष्ण सिंह बघेल को वेतन और अन्य मदों से कुल ₹30,18,691 की वैध आय प्राप्त हुई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी अवधि में उनका कुल व्यय ₹54,43,005 पाया गया।

यानी, वैध आय के मुकाबले ₹24,24,314 का व्यय अधिक था, जो आय के सापेक्ष 80.31% अधिक बैठता है। जांच में पाया गया कि आरोपी इस अतिरिक्त आय के स्रोत का कोई संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाए थे। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने दी सशर्त राहत – मामले की गंभीरता के बावजूद, अदालत ने आरोपित कृष्ण सिंह बघेल की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि पुलिस बघेल को गिरफ्तार करती है, तो उन्हें एक-एक लाख रुपए के दो जमानतें और एक बंधपत्र देने पर रिहा कर दिया जाए।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी और उनके सहयोगी शादाब अहमद, आशुतोष पाठक, और संजय पटेल एडवोकेट ने जोरदार पैरवी की।
यह फैसला दिखाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए, अभियुक्तों को अग्रिम जमानत का लाभ मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई किस ओर रुख लेती है।




