बनारस की पवित्र भूमि पर दिनांक 15 नवंबर 2025 को ‘बनारस क्वीयर प्राइड’ ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया। जानिए कांशीराम आवास में आयोजित हुई बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन कैसे समानता, बंधुत्व और खेल भावना को एक साथ लाया। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी नीलू मिश्रा ने विजेताओं को किया सम्मानित।
धर्म और संस्कृति की नगरी बनारस ने एक बार फिर पूरे देश को प्रेरित किया है। दिनांक 15 नवंबर 2025 को ‘बनारस क्वीयर प्राइड’ के तत्वावधान में कांशीराम आवास, वाराणसी में आयोजित हुई बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि समाज में बंधुत्व और समावेशी माहौल बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेल गतिविधियों के माध्यम से क्वीयर समुदाय, दलित युवा और अन्य प्रतिभागियों को एक साझा, सम्मानजनक मंच प्रदान करना था।

दिन भर चले इस अनूठे आयोजन में कुल दस खेल प्रतियोगिताएं हुईं। इनमें क्वीयर समुदाय के सदस्यों, कांशीराम आवास के दलित युवा और युवतियों, और बनारस के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी नीलू मिश्रा ने दिया प्रेरणादायक संदेश
इस ऐतिहासिक बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय फेम की खिलाड़ी नीलू मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और अपने संबोधन में कहा:

“समाज अभी तक पूरी तरह जागरूक नहीं हुए हैं। हम शिक्षित होने का दावा करते हैं, लेकिन अभी भी क्वीयर समुदाय हमारे कंधे से कंधा मिलाकर नहीं आगे आ पाए हैं। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है इतने उत्साह के साथ आप लोगों को खेलते हुए देखकर। और एक अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में यहीं कहेंगे कि अगर आप फिट हैं तो हित हैं।”
उनका यह संदेश प्रतिभागियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा था, जिसने बनारस की इस प्रतियोगिता के महत्व को और बढ़ाया।
उद्घाटन और संचालन: एकजुटता की झलक
कार्यक्रम की शुरुआत बनारस क्वीयर प्राइड की संस्थापक आरोही के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। इस अनूठी पहल का औपचारिक शुभारंभ लोक गायिका ज्योति, उम्मीद फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र, और एशियन ब्रिज इंडिया से साहिल ने किया।

खिलाड़ियों को उत्साहित करते हुए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की प्रधानाचार्या विशाखा सिंह ने खेल के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, “जब हम खेलते हैं तो हम यह नहीं देखते कि खेलने वाला कौनसे धर्म का, कौनसे जाति का है, वह अमीर है या गरीब है, उनका जेंडर और सेक्सुअलिटी क्या है? खेल हमें जोड़ता है।” पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन अनन्या मिथि और राधा द्वारा किया गया।
संवाद सत्र: खेल और समावेश पर चर्चा
दिनभर की प्रतियोगिताओं के बाद, एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें नीलू मिश्रा जी और विशाखा सिंह जी के साथ योग शिक्षिका अंजु, भारती शिक्षा निकेतन के अध्यापक धनंजय, सद्भावना संगम से जागृति, नेशनल अलाइंस फार सोशल जस्टिस से अनूप श्रमिक, UNICEF से गुरदीप समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने खेल भावना, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समावेशी समाज के महत्व पर प्रेरक संदेश दिए।

कई संस्थाओं ने मिलकर किया इस ‘अनूठे आयोजन’ को सफल
इस महत्वपूर्ण बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन को सफल बनाने में बनारस की कई संस्थाओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति और सहयोग रहा। इनमें प्रिज्मैटिक फाउंडेशन, एशियन ब्रिज इंडिया, सोहार्द पीस सेंटर, उम्मीद फाउंडेशन, दामिनी, सद्भावना संगम और उमाकांत प्रमुख रहे।

साथ ही, नीति, रुमान, चंदन, अफसाना, आर्या, हेतवी, श्रेया, अनामिका, कैलाश, आसिम और नैंसी जैसे सक्रिय स्वयंसेवकों की भागीदारी भी सराहनीय रही।
बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन ने स्पष्ट कर दिया है कि बनारस अब केवल परंपराओं का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और समानता का भी केंद्र बन रहा है।



