चितईपुर, वाराणसी में दर्ज जानलेवा हमले के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने किया खारिज कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार (षष्ठम) ने आयुष सिंह की याचिका को निरस्त किया। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, विनोद पाण्डेय, विवेक शंकर तिवारी, मयंक मिश्रा और शुभेन्दु पाण्डेय ने मजबूती से पक्ष रखा।

वाराणसी: आपराधिक मामलों में त्वरित और न्यायसंगत निर्णय देना न्यायालय की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी क्रम में, वाराणसी जनपद के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश भ्र०नि०अधि० (यू०पी०एस०ई०बी०), विनोद कुमार (षष्ठम) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

थाना चितईपुर में दर्ज मुअसं. 200/2025 से संबंधित जानलेवा हमले के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने किया खारिज कर दिया है। यह याचिका अभियुक्त आयुष सिंह की ओर से दाखिल की गई थी, जिसे न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया।

मजबूत कानूनी पक्ष ने रखी वादी की बात – न्यायालय में वादी मुकदमा की ओर से वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ताओं की टीम ने मजबूती से पक्ष रखा। इस टीम में श्रीनाथ त्रिपाठी, विनोद पाण्डेय, विवेक शंकर तिवारी, मयंक मिश्रा, शुभेन्दु पाण्डेय सहित कई अन्य अधिवक्तागण शामिल थे। उनके द्वारा पेश किए गए तर्कों और साक्ष्यों ने न्यायालय के निर्णय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्यों जानलेवा हमले के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने किया खारिज? न्यायालय ने पत्रावली के गहन अवलोकन के बाद यह स्पष्ट किया कि जानलेवा हमले के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने किया खारिज करने के पर्याप्त आधार मौजूद थे।

  • गंभीर आरोप: पत्रावली के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि प्रार्थी/अभियुक्त पर अन्य अभियुक्तगणों (अनन्त सिंह, अर्चित, सौरभ व तीन-चार अज्ञात) के साथ मिलकर, वादी मुकदमा को भद्दी गालियां देने, जान से मारने की धमकी देने और सड़क व ईंटों से मार-पीट करते हुए हत्या करने का प्रयत्न करने का गंभीर आरोप है। यह कृत्य धारा-191(2), 115(2), 351(3), 352, 109 (1) बीएनएस के तहत आता है।
  • विवेचना है प्रचलित: मामले की विवेचना अभी भी प्रचलित है।
  • गंभीर चोटें: पत्रावली पर उपलब्ध सी०डी० नं०06 और चिकित्सीय आख्या (Medical Report) दर्शाती है कि चुटैल (पीड़ित) को हेड इंजरी (सिर में चोट), चेस्ट (छाती) और शरीर के अन्य भागों में चोटें आई हैं। साथ ही, उसके शरीर पर 2 सेंटीमीटर गहरा घाव भी पाया गया है।

मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और पीड़ित की चोटों की गंभीरता को देखते हुए, न्यायालय ने यह मत व्यक्त किया कि आवेदक/अभियुक्त आयुष सिंह की ओर से प्रस्तुत प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या-4345/2025 खारिज किए जाने योग्य है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और पत्रावलियों का अवलोकन किया। इसके उपरांत, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार (षष्ठम) के द्वारा जानलेवा हमले के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने किया खारिज करने का आदेश पारित किया गया, जो न्याय की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम है।

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