मिशन समाज सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डंपी तिवारी बाबा ने विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगों को बांटे सैकड़ों कंबल, एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने की शिरकत

वाराणसी: मानवीय संवेदना और निस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश करते हुए, मिशन समाज सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डंपी तिवारी बाबा ने इस बार विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर को एक खास पहचान दी। ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए, डंपी तिवारी बाबा ने अपने आवास पर एक विशेष कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में सैकड़ों दिव्यांग भाइयों और बहनों को गर्म कंबल वितरित किए गए, ताकि वे कड़ाके की ठंड से अपना बचाव कर सकें। कंबल पाते ही दिव्यांगों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने मिशन समाज सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डंपी तिवारी बाबा का हृदय से आभार व्यक्त किया।

एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए, एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने मिशन समाज सेवा के इस सराहनीय कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि समाज के वंचित वर्ग की सेवा करना ही सच्ची मानवता है। एसीपी तनेजा जी की उपस्थिति ने दिव्यांगों और आयोजकों, दोनों का उत्साहवर्धन किया।

ये गणमान्य हस्तियां भी थीं मौजूद – डंपी तिवारी बाबा के इस पुनीत कार्य में कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपना सहयोग दिया और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उपस्थित लोगों में सीमा चौधरी, सलीम, विपुल दुबे, दुर्गेश पांडे, अमन मिश्रा, और विजय शंकर पांडे प्रमुख थे। इन सभी सहयोगी गणों ने मिलकर कंबल वितरण के इस नेक काम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मिशन समाज सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डंपी तिवारी बाबा ने सभी अतिथियों और सहयोगी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया और दोहराया कि उनकी संस्था भविष्य में भी इसी तरह समाज सेवा के कार्यों में जुटी रहेगी। उन्होंने कहा, “दिव्यांगजन हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं, और उनकी जरूरतों को पूरा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।”

मिशन समाज सेवा: सेवा ही धर्म मिशन समाज सेवा संस्था, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष डंपी तिवारी बाबा हैं, लंबे समय से गरीबों, असहायों और वंचितों के लिए काम करती आ रही है। चाहे वह चिकित्सा सहायता हो, भोजन वितरण हो या वस्त्र दान, यह संस्था हमेशा आगे बढ़कर जरूरतमंदों की मदद करती है। डंपी तिवारी बाबा का यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि सच्ची सेवा की कोई सीमा नहीं होती।

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