वाराणसी की दालमण्डी गली चौड़ीकरण में नेतागिरी ना आई काम! विरोध करने वाले भवन स्वामी मुख्तार अहमद ने आखिर प्रशासन से 27 लाख लगा मकान का दाम पर समझौता किया। क्या सपा नेता इमरान बबलू को बनाया गया बलि का बकरा? जानिए पूरा मामला।
वाराणसी: वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र की दालमण्डी गली चौड़ीकरण परियोजना लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। जहाँ एक तरफ प्रशासन इस महत्वपूर्ण कार्य को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और कथित राजनीतिक हस्तियों के बीच भारी विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, वह दिखाती है कि कथित नेतागिरी ना आई काम और अंततः भवन स्वामी को प्रशासन के सामने झुकना पड़ा।
दालमण्डी गली चौड़ीकरण की जद में आया मुख्तार अहमद का मकान – यह पूरा मामला नईसड़क चौराहे पर स्थित कपड़ा मण्डी के नुक्कड़ पर मौजूद मुख्तार अहमद के एक मकान से जुड़ा है। लगभग एक माह पहले, इस मकान के ध्वस्तिकरण के लिए विकास प्राधिकरण, एसीपी और कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची थी।
उस समय, भवन स्वामी मुख्तार अहमद के पुत्र अफजल उर्फ अदनान ने भारी विरोध किया था। मौके पर अफजल उर्फ अदनान के समर्थकों के साथ ही कई समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और खुद को व्यापार मण्डल का अध्यक्ष बताने वाले फारूख नामक व्यक्ति भी मौजूद थे। इस हंगामे के चलते, थाना चौक पर अफजल उर्फ अदनान समेत पाँच नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। यह सब लोग दालमण्डी के लोगों का रहनुमा बनने की कोशिश कर रहे थे, मानो वे उनके लिए ही लड़ रहे हों।
27 लाख लगा मकान का दाम और खत्म हुई ‘नेतागिरी’ – विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर भारी विरोध करने वाले भवन स्वामी और उनके पुत्र अब बैकफुट पर आ गए हैं। सूत्रों का दावा है कि प्रशासन ने मुख्तार अहमद के उक्त भवन का सौदा 27 लाख रुपये में कर दिया है। यानी, जिस मकान के लिए इतना हो-हल्ला हुआ और इतना विरोध किया गया, वह अंततः 27 लाख लगा मकान का दाम के रूप में तय हो गया।
सूत्रों के अनुसार, भवन स्वामी ने प्रशासन से यह शर्त रखी है कि चौक की तरफ से ध्वस्तिकरण का कार्य करते हुए नईसड़क पर आने पर ही वे अपना भवन प्रशासन को सौंप देंगे।
सपा नेता बने बलि का बकरा? – इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब इस विरोध प्रदर्शन में नामजद किए गए लोगों में से एक, सपा नेता इमरान बबलू की गिरफ्तारी हुई। चौक थाने के दालमण्डी चौकी प्रभारी प्रकाश सिंह चौहान द्वारा की गई इस गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
वायरल वीडियो में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया: भवन स्वामी मुख्तार अहमद के पुत्र अफजल उर्फ अदनान, जो खुद भी मुकदमे में नामजद अभियुक्त हैं, वे सपा नेता इमरान बबलू को अपने विश्वास में लेकर पुलिस के वाहन पर बैठाकर थाना चौक तक लाए थे, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, इमरान बबलू को किसी अन्य मामले में भी जेल भेजा गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस समय इमरान बबलू की गिरफ्तारी हुई और उन्हें थाने तक लेकर जाने वाला व्यक्ति (अफजल उर्फ अदनान) भी उसी मुकदमे का नामजद अभियुक्त था, तो उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
- क्या यह सारा खेल सेटिंग का था?
- क्या सपा नेता इमरान बबलू को ही बलि का बकरा बना दिया गया?
- बाकी नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई?
- या यह मुकदमा सिर्फ भवन स्वामी और उनके पुत्र पर दबाव बनाकर भवन का बैनामा शासन के पक्ष में कराना था?
फिलहाल, यह सभी सवाल भविष्य के गर्भ में हैं और बीएम ब्रेकिंग न्यूज की पड़ताल जारी है। मगर एक बात साफ है: नेतागिरी ना आई काम, और अंततः दालमण्डी में 27 लाख लगा मकान का दाम, जिस पर भवन स्वामी को समझौता करना पड़ा।







