बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, यशपाल यादव और संदीप यादव ने पक्ष रखा।
वाराणसी: हत्यारोपी को गिरफ्तार करने पहुँची पुलिस टीम पर हमले के मामले में मिली जमानत ने एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया की गति को दर्शाया है। सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने के इस हाई-प्रोफाइल मामले में, वाराणसी की एक अदालत ने दो आरोपियों को बड़ी राहत दी है।
प्रभारी जिला जज संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने, सारनाथ निवासी सुशील यादव और चौबेपुर निवासी गौतम यादव को सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और बंधपत्र जमा करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी खबर है जो इस मामले पर करीब से नज़र रखे हुए थे।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दमदार दलीलें – अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, यशपाल यादव और संदीप यादव ने मजबूती से पक्ष रखा। उनकी दलीलें ही इन आरोपियों को पुलिस टीम पर हमले के मामले में मिली जमानत दिलवाने में महत्वपूर्ण साबित हुईं।
क्या था पूरा मामला? – यह मामला देवरिया जनपद के कोतवाली में दर्ज हत्या के एक मामले से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सर्विलांस प्रभारी देवरिया के निरीक्षक सादिक परवेज ने सारनाथ थाने में इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।
घटना की शुरुआत: 7 दिसंबर 2025 को निरीक्षक सादिक परवेज को मुखबिर से सूचना मिली कि देवरिया हत्याकांड का वांछित आरोपी सुनील यादव सारनाथ स्थित बुद्धा सिटी कॉलोनी में अपने घर पर मौजूद है और भागने की फिराक में है।
पुलिस की दबिश: इस सूचना के आधार पर, स्थानीय सारनाथ थाने की पुलिस टीम के साथ मिलकर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पर दबिश दी गई।
हमला और सरकारी कार्य में बाधा: पुलिस को देखते ही सुनील यादव ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस टीम ने उसे धरदबोचा। आरोप है कि इसी दौरान सुनील के भाई सुशील यादव, साला गौतम यादव, पत्नी निशा यादव और घर के अन्य 5-6 अज्ञात सदस्यों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला किया और मारपीट की।
वर्दी फाड़ी, पिस्टल छीनने का प्रयास: इस दौरान उपनिरीक्षक अविनाश मौर्य की वर्दी फाड़ दी गई और उनकी पिस्टल छीनने का प्रयास किया गया। हमलावरों ने सरकारी कार्य में बाधा डालकर आरोपी सुनील यादव को भगाने की पूरी कोशिश की, जिससे इलाके में अफरातफरी और भगदड़ मच गई।
फरार कराने की कोशिश: पुलिस बल द्वारा किसी तरह आरोपी को पकड़कर थाने ले जाया जाने लगा, तब भी सुशील यादव और गौतम यादव ने अपनी काले रंग की फॉर्च्यूनर गाड़ी से सरकारी वाहन का पीछा किया और एक बार फिर मुलजिम को भगाने का प्रयास किया।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह – हालांकि, इस गंभीर मामले में अब पुलिस टीम पर हमले के मामले में मिली जमानत मिल गई है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। जमानत मिलना रिहाई की प्रक्रिया का हिस्सा है, और मामले की सुनवाई आगे भी चलती रहेगी। कोर्ट ने यह राहत देते समय, आरोपी सुशील यादव और गौतम यादव को निश्चित रूप से जांच में सहयोग करने और सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के निर्देश दिए होंगे।
इस घटना ने एक बार फिर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया में होने वाले व्यवधानों पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन कोर्ट के इस फैसले से दो आरोपियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।







