सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर को शुक्रवार को वाराणसी की जिला अदालत से बड़ी राहत मिली है। चौक थाने में दर्ज एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने अमिताभ ठाकुर की जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने उन्हें 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और उतनी ही धनराशि का बंधपत्र (Bond) दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।

यह मामला हिंदू युवा वाहिनी के नेता और बीडीए (BDA) के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला की शिकायत पर आधारित है। अम्बरीष सिंह भोला ने 9 दिसंबर को चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया (X/ट्विटर) हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में अम्बरीष सिंह भोला पर आपराधिक संलिप्तता के झूठे आरोप लगाए गए। बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण में बिना किसी साक्ष्य के भोला का नाम घसीटा गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राजनीतिक द्वेष: आरोपी को केवल राजनीतिक द्वेष और शासन-प्रशासन के दबाव में फंसाया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज: पूर्व आईपीएस होने के नाते अमिताभ ठाकुर हमेशा सरकारी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहे हैं, जिसकी कीमत उन्हें जबरिया सेवानिवृत्ति के रूप में चुकानी पड़ी। जांच की मांग: उन्होंने जो ट्वीट किया था, वह किसी की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक के तौर पर मामले की विधि सम्मत जांच की मांग के उद्देश्य से किया गया था। इसमें भाषा का प्रयोग पूरी तरह मर्यादित था।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अमिताभ ठाकुर पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं और उनकी एक हिस्ट्रीशीट है। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अमिताभ ठाकुर को जमानत देने का फैसला सुनाया।

बता दें कि इस मामले में न्यायिक रिमांड के लिए पुलिस अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल से लेकर वाराणसी की सेंट्रल जेल आई थी। कोर्ट में पेशी और रिमांड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पुनः कड़ी सुरक्षा में देवरिया जेल भेज दिया गया था। अब जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। अमिताभ ठाकुर और उनका संगठन ‘आजाद अधिकार सेना’ लगातार प्रदेश में विधि विरुद्ध कार्यों और सत्ता पक्ष के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिसे बचाव पक्ष ने इस कानूनी कार्रवाई का मुख्य कारण बताया।

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