वाराणसी के नक्खीघाट कांजी हाउस से संदिग्ध परिस्थितियों में बछड़ों को गायब करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष ने वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले में डॉक्टर और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी में गौवंश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले को लेकर राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी ने मोर्चा खोल दिया है। वाहिनी के जिलाध्यक्ष अबू हुरेरा उर्फ जहीर बाबा ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर साठगांठ कर कांजी हाउस से गौवंश को तस्करी के लिए बाहर भेजने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम? कोनिया विजयीपुरा निवासी और राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अबू हुरेरा के अनुसार, नक्खीघाट स्थित नगर निगम के कांजी हाउस से बीती 13 और 14 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात लगभग 73 बछड़ों को नगर निगम के वाहन से बाहर निकाला गया। आरोप है कि पशु संचल दस्ता के वाहन चालक सतीश कुमार, मुंशी कैलाश पाण्डेय और रात्रि कर्मचारी राजेश यादव ने इन बेजुबानों की निकासी कराई।

पशु चिकित्सक की भूमिका पर सवाल अबू हुरेरा ने बताया कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि पशु चिकित्सक डॉ. संतोष पाल के इशारे पर इन बछड़ों को कांजी हाउस से निकाला गया। दावा किया गया है कि इन पशुओं को बाबतपुर के आगे किसी सुनसान स्थान पर ले जाकर छोड़ दिया गया है। वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले में यह आरोप सबसे गंभीर है कि गौवंश को संरक्षित करने के बजाय उन्हें असुरक्षित स्थानों पर फेंक दिया गया या तस्करों के हवाले कर दिया गया।

कथित कबूलनामा और सुरक्षित साक्ष्य शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने वाहन चालक सतीश कुमार से फोन पर बात की, तो पहले उसने टालमटोल की, लेकिन बाद में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। चालक ने कथित तौर पर यह भी स्वीकार किया कि डॉ. संतोष पाल के कहने पर पहले भी कई बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। अबू हुरेरा का दावा है कि उनके पास इस पूरी बातचीत के पुख्ता साक्ष्य सुरक्षित हैं।

तस्करी की आशंका और न्याय की मांग – जिलाध्यक्ष अबू हुरेरा ने आशंका जताई है कि इन बछड़ों को आवारा छोड़ने के नाम पर असल में पशु तस्करों के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि बेजुबान गौवंश की रक्षा सुनिश्चित हो सके। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस पर स्पष्टीकरण की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *