लखनऊ। अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर पुरानी दबी हुई चिंगारी सुलग उठी है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी सोनेलाल पटेल की मौत की जांच का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। वहीं वायरल पोस्ट के अनुसार इस बार जनता दल यूनाइटेड (JDU) की प्रदेश उपाध्यक्ष और बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर सीधे केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल पर तीखे सवालों की बौछार कर दी है।
शालिनी सिंह पटेल ने उठाए गंभीर सवाल = शालिनी सिंह पटेल ने एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, “डॉ. सोनेलाल पटेल जी ने अपना पूरा जीवन पिछड़ों, वंचितों, किसानों और सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया था। उनका संघर्ष आज भी देश और प्रदेश के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। लेकिन उनकी जयंती पर सबसे बड़ा और गंभीर सवाल उन्हीं लोगों से पूछा जाना चाहिए जो आज उनके नाम और उनकी राजनीतिक विरासत के दम पर सत्ता का सुख भोग रहे हैं।”
उन्होंने साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि उस समय जनता से यह बड़ा वादा किया गया था कि सोनेलाल पटेल की मौत की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) से कराई जाएगी। शालिनी ने पूछा:
“आज केंद्र सरकार में आप खुद मंत्री हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में भी आपका परिवार मंत्री पद पर काबिज है। जब सरकार में आपकी इतनी बड़ी भागीदारी है, राजनीतिक प्रभाव है और पूरा अवसर भी है, तो फिर आज तक सोनेलाल पटेल की मौत की जांच को लेकर सीबीआई की मांग पूरी क्यों नहीं की गई?”
शालिनी सिंह पटेल यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने सीधे अनुप्रिया पटेल पर निशाना साधते हुए बेहद भावुक और तीखा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा, “आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी या राजनीतिक दबाव है जिसके आगे सब मौन हैं? क्या सरकार में मिला मंत्री पद एक बेटी के लिए अपने पिता को न्याय दिलाने के सवाल से भी बड़ा हो गया है? जिन डॉ. सोनेलाल पटेल के नाम, चेहरे और आजीवन किए गए संघर्ष की बदौलत आज राजनीति में इतनी बड़ी पहचान मिली है, क्या उनके निधन से जुड़े रहस्यों का जवाब जानना इस समाज और उनके समर्थकों का लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है?”
उन्होंने आगे साफ तौर पर कहा कि अगर निष्पक्ष जांच से सच्चाई सबके सामने आने में किसी को कोई गुरेज या आपत्ति नहीं है, तो फिर सोनेलाल पटेल की मौत की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने से इतना परहेज क्यों किया जा रहा है? लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है, इसे किसी का अपमान नहीं समझा जाना चाहिए।
अंधसमर्थकों और जनहित के मुद्दों पर भी बोला हमला = अपने बयान में जेडीयू उपाध्यक्ष ने अपना दल (एस) के समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब भी हम समाज के हित में यह जायज सवाल उठाते हैं, तो कुछ अंधसमर्थक बौखलाने और बिलबिलाने लगते हैं। लेकिन यही लोग तब पूरी तरह से खामोश क्यों हो जाते हैं जब समाज के गरीब लोगों की सरेआम हत्या होती है, अपने हक के लिए लड़ रहे किसानों पर लाठियां बरसाई जाती हैं, महिलाओं पर अत्याचार होता है, रोजगार मांग रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया जाता है, पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं और 69,000 शिक्षक भर्ती जैसे बड़े मामलों में अभ्यर्थी सालों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं?”
‘नारों से नहीं, जवाबदेही से जीतेंगे विश्वास’ = बयान के आखिरी हिस्से में शालिनी सिंह पटेल ने जवाबदेही तय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर वाकई में डॉ. सोनेलाल पटेल जी के संघर्षों और उनकी विरासत का सच्चा सम्मान करना है, तो खोखले नारों से काम नहीं चलेगा। उनके निधन से जुड़े जो सवाल सालों से हवा में तैर रहे हैं, उन पर स्पष्ट जवाब देना होगा और सोनेलाल पटेल की मौत की जांच के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सच से कब तक बचा जाएगा, एक न एक दिन जनता के हर सवाल का जवाब देना ही पड़ेगा।
क्या है इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि? = आपको बता दें कि अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल का निधन 17 अक्टूबर 2009 को कानपुर के पास एक बेहद संदिग्ध सड़क हादसे में हो गया था। हादसे के बाद से ही उनके समर्थक और परिवार का एक धड़ा इस दुर्घटना को सोची-समझी साजिश बताता रहा है और लगातार सोनेलाल पटेल की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग करता आया है। साल 2012 के यूपी चुनाव में अपना दल ने इसे अपना सबसे मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी यह मांग पूरी न होने पर अब विपक्ष हमलावर है।
अपना दल (एस) का क्या है स्टैंड? = सोनेलाल पटेल की मौत की जांच को लेकर शालिनी सिंह पटेल द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों पर फिलहाल अपना दल (सोनेलाल) की ओर से कोई भी आधिकारिक या लिखित बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं का दबी जुबान में कहना है कि यह केवल राजनीति चमकाने के लिए उठाया गया मुद्दा है और संगठन समय आने पर इसका उचित मंच से सही जवाब देगा।




