वाराणसी: धर्म और न्याय की नगरी वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रेलकर्मी ने कर्जदारों के तगादे से बचने के लिए खुद के साथ ही लाखों रुपये की चाकू मारकर लूट होने की एक झूठी और सनसनीखेज कहानी रच डाली। हालांकि, पुलिस की पैनी नजर और मुस्तैदी के आगे यह नाटक ज्यादा देर टिक नहीं सका। जांच में साफ हो गया कि कर्ज में डूबा रेलवे कर्मी लूट होने का फर्जी बनाया पृष्ठभूमि ताकि उसे उधार दिए पैसे वापस न करने पड़ें। आइए जानते हैं कि सिगरा पुलिस ने किस तरह कुछ ही घंटों में इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया।

रेलवे कर्मी ने पुलिस को क्या दी थी सूचना? = मूल रूप से लक्ष्मीपुर सिसवन डाला, सिवान (बिहार) के रहने वाले अमित कुमार श्रीवास्तव पुत्र अवधेश प्रसाद श्रीवास्तव रेलवे विभाग के कर्मचारी हैं। वर्तमान में वह वाराणसी के चंदवा चित्तूपुर (थाना सिगरा) में किराए के मकान में रहते हैं।

अमित ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को पुलिस हेल्पलाइन 112 और सिगरा थाने को सूचना दी कि : वह अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से 2,10,000 रुपये लेकर महमूरगंज स्थित बैंक शाखा में जमा करने जा रहे थे। दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही वह लोको कॉलोनी के पास पहुंचे, एक प्लैटिना मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने उन पर चाकू से हमला किया और उनके पास मौजूद 2.10 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। दिनदहाड़े रेलवे कॉलोनी के पास चाकू मारकर लूट की सूचना से सिगरा पुलिस और रेलवे महकमे में खलबली मच गई।

पुलिस टीम और SOG ने खंगाले CCTV कैमरे = मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक सिगरा ने तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचित किया और भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले के खुलासे के लिए तुरंत थाने की पुलिस और SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीम को मौके पर बुला लिया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं का सहारा लिया : घटनास्थल और उसके आसपास के प्राइवेट CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। वाराणसी पुलिस के हाई-टेक ‘त्रिनेत्र’ कैमरे के फुटेज का बारीकी से अवलोकन किया गया। पीड़ित अमित कुमार श्रीवास्तव की पत्नी से भी पुलिस ने अलग से बातचीत की।

CCTV फुटेज और बयानों में अंतर ने खोला राज = जैसे ही पुलिस ने त्रिनेत्र और स्थानीय कैमरों की फुटेज का मिलान अमित द्वारा बताई गई कहानी से किया, तो दाल में कुछ काला नजर आया। अमित जिस समय पर लूट होने की बात कह रहे थे, सीसीटीवी फुटेज में उस दौरान ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि या प्लैटिना सवार तीन लोग दिखाई नहीं दिए। जब बयानों और तकनीकी साक्ष्यों में भारी भिन्नता पाई गई, तो पुलिस को अमित पर शक गहरा गया। पुलिस टीम ने जब अमित से कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और रोने लगा।

स्वीकारी गलती: “कर्जदारों से बचने के लिए रचा था षड्यंत्र” = कड़ाई से पूछताछ में आरोपी रेलकर्मी अमित कुमार श्रीवास्तव ने कबूल किया कि उसने ही इस पूरी वारदात की झूठी कहानी गढ़ी थी। उसने पुलिस को बताया :

    “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मैंने बाजार में कई लोगों से भारी मात्रा में पैसा उधार लिया था। कर्जदार लगातार मुझसे पैसे वापस मांग रहे थे और मैं चुकाने की स्थिति में नहीं था। इस दलदल से बचने के लिए मैंने यह तरीका सोचा कि कर्ज में डूबा रेलवे कर्मी लूट होने का फर्जी बनाया पृष्ठभूमि ताकि जब सबको जानकारी हो जाएगी कि मेरे साथ ढाई लाख की लूट हो गई है, तो कोई मुझसे अपना पैसा वापस नहीं मांगेगा।”

    सिगरा पुलिस और वाराणसी SOG की टीम ने बेहद पेशेवर तरीके से काम करते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर इस फर्जी लूट कांड का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस की इस त्वरित और वैज्ञानिक कार्रवाई की स्थानीय लोगों और व्यापारियों द्वारा काफी सराहना की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस को गुमराह करने और झूठी सूचना देकर सनसनी फैलाने के मामले में आरोपी रेलकर्मी के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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