वाराणसी में संगीत जगत को गहरा सदमा। भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के भतीजे और प्रख्यात उस्ताद फतेह अली खान का हुआ अचानक निधन। शोक में डूबा कला जगत।
वाराणसी: सुर और संगीत की नगरी काशी से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। वाराणसी जनपद में गुरुवार को एक बार फिर संगीत के घराने में सन्नाटा पसर गया और उस्ताद फतेह अली खान के रूप में मानों एक और शहनाई शांत हो गई। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के भतीजे उस्ताद फतेह अली खान का अचानक निधन हो गया है। उनके इस आकस्मिक निधन से न केवल कला जगत बल्कि पूरे वाराणसी क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
शोक में डूबा कला जगत और शुभचिंतक = उस्ताद फतेह अली खान के निधन की खबर मिलते ही वाराणसी के संगीत प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और उनके शुभचिंतकों में गहरा दुख व्याप्त हो गया। अपने परिवार और चाहने वालों को रोता-बिलखता छोड़, उस्ताद फतेह अली खान अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार और संगीत की अनमोल विरासत छोड़ गए हैं।

शास्त्रीय संगीत और शहनाई की परंपरा से जुड़ा यह परिवार हमेशा से काशी की सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा रहा है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत को आगे बढ़ाने वाले परिवारों में से एक होने के कारण उस्ताद फतेह अली खान का यूं अचानक चले जाना कला प्रेमियों के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।
वाराणसी में गूंजती रही है शहनाई की धुन = वाराणसी हमेशा से अपनी सांस्कृतिक धरोहर और उस्तादों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता रहा है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परिवार से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद फतेह अली खान ने भी जीवनभर इस महान परंपरा को सहेजने का काम किया। गुरुवार को उनके निधन के साथ ही जैसे एक और शहनाई शांत हो गई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
क्षेत्र के गणमान्य लोगों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। अंतिम विदाई के दौरान हर किसी की जुबान पर यही चर्चा थी कि उस्ताद फतेह अली खान का जाना काशी के संगीत जगत के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है जिसे भरना बेहद कठिन होगा।


