सोशल नेटवर्किंग साइट के स्क्रीनशॉट लेकर जारी होगा नोटिस, समाप्त होगी बार की सदस्यता
बार एसोसिएशन फर्जी अधिवक्ताओं पर लगाम लगाने और अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध
वाराणसी। वाराणसी कचहरी और कलेक्ट्रेट में फर्जी अधिवक्ताओं की पहचान करने में ‘दी सेंट्रल बार एसोसिएशन’ और ‘दी बनारस बार एसोसिएशन’ द्वारा गठित अधिवक्ता जांच समिति (जिसे ‘उड़ाका दल’ भी कहते हैं) का काम वाकई काबिले तारीफ है। इस समिति के सक्रिय होने से फर्जी अधिवक्ताओं में खलबली मची हुई है। आलम यह है कि जो लोग बरसों से खुद को वकील बताकर काम कर रहे थे, वे अब या तो कचहरी आना छोड़ चुके हैं, या अगर आ भी रहे हैं तो आम लोगों की तरह ही। इस उड़ाका दल के काम की हर जगह, कचहरी से लेकर कलेक्ट्रेट तक, खूब तारीफ हो रही है।
फर्जी वकीलों के आकाओं में दहशत – इस सराहनीय काम से फर्जी वकीलों के ‘आकाओं’ में भी डर फैल गया है। वे किसी भी तरह से इस अभियान को रोकना चाहते हैं और इसके लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सएप आदि पर जाति और धर्म के नाम पर बेतुके आरोप लगा रहे हैं। अधिवक्ता जांच समिति के चेयरमैन, वरिष्ठ अधिवक्ता दिवाकर दुबे और वरिष्ठ समिति के सदस्य ओम शंकर श्रीवास्तव ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
अब होगी सख्त कार्रवाई – सेंट्रल बार एसोसिएशन और बनारस बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बातचीत के बाद यह तय किया गया है कि उन सभी लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा जो सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अधिवक्ता जांच समिति के खिलाफ बेतुके और आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। इन नोटिसों का आधार इन सोशल नेटवर्किंग पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट होंगे। अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो ऐसे लोगों की बार की सदस्यता खत्म कर दी जाएगी और उन्हें वेलफेयर के लाभ से भी वंचित कर दिया जाएगा।
वरिष्ठ समिति के इस फैसले का समर्थन अधिवक्ता गौतम कुमार झा, यामिनी शर्मा, जयश्री पाठक, सुधा सिंह, रंजीत मिश्रा, अमित उपाध्याय, मंगला तिवारी, अरविंद पाण्डेय, कमलेश यादव, सत्य प्रकाश सिंह सुनील और राघवेंद्र दूबे ने भी किया है। यह कदम दिखाता है कि बार एसोसिएशन फर्जी अधिवक्ताओं पर लगाम लगाने और अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।





