वाराणसी: गंगा का रौद्र रूप वाराणसी में लगातार जारी है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जिले के 46 माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिससे 11 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप हो गई है। अब शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की तैयारी शुरू कर दी है।
शिक्षा व्यवस्था पर बाढ़ की मार – जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित कुल 46 विद्यालयों में से 21 ग्रामीण क्षेत्रों में और 25 शहरी क्षेत्रों में हैं। वरुणा नदी का पानी घुसने से ढेलवरियां, सलारपुर और हुकुलगंज के प्राथमिक विद्यालयों में जलभराव हो गया है। दस विद्यालय तो ऐसे हैं जिनके क्लास रूम तक पानी पहुंच गया है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जाएंगी।
जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोग परेशान – गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नगवां नाले से पानी प्रवेश कराना शुरू कर दिया है, जिससे रामेश्वर मठ, भागवत महाविद्यालय से लेकर संगम पुरी कॉलोनी तक पानी पहुंच गया है। संकट मोचन मंदिर के पीछे तक पानी पहुंचने से लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। नक्खी घाट क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव सबसे ज़्यादा दिख रहा है, जहां अभी भी 150 लोग फंसे हुए हैं। पीड़ितों की मांग है कि नावों की संख्या बढ़ाई जाए।
सीवर का बैक फ्लो और निर्माण कार्य बाधित – बाढ़ का एक और गंभीर पहलू यह है कि गंगा की ओर जाने वाला सीवर अब नालों के ज़रिये उल्टा शहरों में लौट रहा है। इसके चलते गोदौलिया में घोड़ा नाला, रोपवे और कई अन्य निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिए गए हैं। अपना घर आश्रम में भी पानी घुस गया है, जिससे वहां के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलकल के सचिव राम औतार ने बताया कि गंगा में बढ़ाव लगातार जारी है और कई नाले बैक फ्लो कर रहे हैं। स्थिति तभी सामान्य होगी जब जलस्तर नीचे आएगा।
राहत और बचाव कार्य जारी – बाढ़ प्रभावित नगवां सोनकर बस्ती और हरिजन बस्ती से 70 परिवारों को गोपी राधा विद्यालय में बने राहत शिविर में भेजा गया है। वहीं, नगवां गंगोत्री विहार कॉलोनी और नगवां नाले के किनारे रहने वाले 12 परिवारों (करीब 43 सदस्य) को प्राथमिक विद्यालय में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ की टीम भी लगातार सक्रिय है और उसने रामेश्वर मठ के पीछे एक होटल संचालक और उनके परिवार को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला।
मालवीय ब्रिज पर ट्रेनों की रफ्तार धीमी, रेलवे अलर्ट पर – गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके चलते उत्तर रेलवे के मालवीय ब्रिज (राजघाट पुल) पर ट्रेनों को कॉशन पर चलाया जा रहा है। ट्रेनें अब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से संचालित हो रही हैं। आरपीएफ और जीआरपी की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है, साथ ही एसएस, टीआई और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
रेल अधिकारियों के अनुसार, मालवीय ब्रिज पर गंगा का जलस्तर शीट से मापा जाता है। 234 शीट चेतावनी बिंदु है, लेकिन वर्तमान में यह 237 शीट तक पहुंच गया है, जिसके कारण ट्रेनों को कॉशन पर चलाया जा रहा है। परिचालन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि 240 शीट तक पानी पहुंचने पर पुल पर एक बार में सिर्फ एक ही ट्रेन संचालित होगी, जबकि अभी अप और डाउन दोनों ट्रेनें एक साथ चलती हैं। ट्रेनों और बाढ़ की मॉनिटरिंग के लिए हर घंटे आरपीएफ और जीआरपी की पेट्रोलिंग जारी है।
मंडलायुक्त ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण – मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने शनिवार को नाव से रविदास पार्क से होकर अस्सी घाट होते हुए ललिता घाट नेपाली मंदिर तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। मंडलायुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिए कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति बाढ़ के पानी में न फंसे। साथ ही, उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों को बाढ़ राहत किट वितरित करने के निर्देश भी दिए।





