सीतापुर: यूपी के सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड में वांछित दो इनामी शूटरों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। इन दोनों शूटरों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, ये दोनों कई अन्य गंभीर मामलों में भी वांछित थे।

पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई – पुलिस अधीक्षक (SP) अंकुर अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार सुबह पिसावां-महोली मार्ग पर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम इलाके में गश्त कर रही थी। इसी दौरान बाइक पर सवार दो लोगों को रुकने का इशारा किया गया। रुकने के बजाय, बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।

जवाबी फायरिंग में ढेर हुए बदमाश – पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस मुठभेड़ में दोनों शूटरों को गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मारे गए शूटरों की पहचान संजय तिवारी उर्फ अकील खान और राजू तिवारी उर्फ रिजवान के रूप में हुई है, जो मिश्रित के अटवा गांव के रहने वाले थे।

पत्रकार की पत्नी ने उठाए सवाल – इस कार्रवाई के बाद, पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की पत्नी रश्मि बाजपेयी ने असंतुष्टि जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो उन्हें हत्याकांड के खुलासे की जानकारी दी थी और न ही मुठभेड़ से पहले शूटरों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हम इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।”

क्या था पूरा मामला? – पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या इसी साल 8 मार्च को हेमपुर ओवरब्रिज पर दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी। इस हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने 34 दिनों बाद किया था। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से तीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिनमें एक मंदिर का पुजारी भी शामिल था। इस मामले के दो मुख्य शूटर संजय तिवारी और राजू तिवारी फरार चल रहे थे, जिनकी तलाश में कई टीमें जुटी हुई थीं।

यह मुठभेड़ पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इन दोनों शूटरों के मारे जाने से एक बड़े आपराधिक मामले का अंत हो गया है।

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