न्यायालय में वादी मुकदमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तारकेश्वरी प्रसाद ने पक्ष रखा

वाराणसी: बड़ादेव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर और समाधि व्यायामशाला पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे भू-माफिया अंकित सिंह और प्रदीप सिंह को अदालत ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने इन लोगों के सभी दावों को खारिज करते हुए मंदिर को उसके मूल स्वरूप में लौटा दिया है, जिससे भक्तों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है।

यह मामला आराजी नंबर 36, मकान नंबर डी-37/116, मोहल्ला बड़ादेव, थाना दशाश्वमेध से जुड़ा है। यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सौ साल से भी अधिक पुरानी समाधि और व्यायामशाला के रूप में भी जाना जाता है। भू-माफिया अंकित सिंह और प्रदीप सिंह ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे इस सार्वजनिक स्थल का बैनामा करा लिया था और खुद को इसका मालिक बताते हुए भक्तों को पूजा-पाठ करने से रोकने लगे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अदालत को गुमराह करके एकतरफा आदेश भी हासिल कर लिया था।

मंदिर और व्यायामशाला के संरक्षक व संयोजक नवीन सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता तारकेश्वरी प्रसाद के माध्यम से अदालत में अंकित सिंह और प्रदीप सिंह के मालिकाना हक को चुनौती दी। लंबी सुनवाई के बाद, 6 अगस्त 2025 को माननीय सिविल जज (जूनियर डिवीजन) शहर वाराणसी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

अदालत ने अंकित सिंह और प्रदीप सिंह के मालिकाना हक और उनके सभी अधिकारों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि उनके दावे झूठे और निराधार हैं। इस फैसले के बाद, मंदिर में दर्शन और पूजा-पाठ फिर से पहले की तरह शुरू हो गए हैं। भक्तों का कहना है कि यह धर्म की जीत है और न्याय व्यवस्था में उनका विश्वास और भी बढ़ गया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “उपरोक्त वर्णित समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए प्रार्थना पत्र 6ग निरस्त किए जाने योग्य है। अतः प्रार्थना पत्र 6ग निरस्त किया जाता है।” इसके साथ ही, अदालत ने 8 सितंबर 2025 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें आगे की कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।

यह फैसला उन सभी भू-माफियाओं के लिए एक सबक है जो धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। बड़ादेव के इस ऐतिहासिक मंदिर के लिए यह एक नई सुबह है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed