नेपाल में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आश्मा न्यौपाने का नाम सबसे प्रेरक उदाहरण है। पत्रकारिता से लेकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों तक, जानिए उनकी सफलता की कहानी।
नेपाल में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई महिलाएं लगातार काम कर रही हैं, और उनमें आश्मा न्यौपाने का नाम आज सबसे प्रेरक उदाहरणों में शामिल है। पत्रकारिता, मॉडलिंग, फिल्म और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनका योगदान न केवल नेपाल में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बना चुका है। आश्मा की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सपने, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी महिला सीमाओं को पार कर सकती है।
काठमांडू में जन्मी आश्मा न्यौपाने का जीवन सामान्य नहीं था। उन्होंने अपनी मां और दादी से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी। उनका सफर उन सभी युवतियों के लिए एक सीख है जो छोटे शहरों या सामान्य परिवारों से निकलकर कुछ बड़ा करना चाहती हैं। शुरुआत: 2014 में सौंदर्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से उन्होंने अपनी पहली पहचान बनाई। मीडिया और मॉडलिंग: इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और मॉडलिंग के साथ-साथ पत्रकारिता में भी अपनी धाक जमाई। बहुआयामी व्यक्तित्व: आज आश्मा न्यौपाने केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। वह पत्रकारिता, फिल्म, मीडिया और सामाजिक कार्य के जरिए समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।
“आश्मा न्यौपाने नेपाल में महिलाओं के लिए एक ऐसा प्रतीक बन चुकी हैं, जो यह सिखाती हैं कि सीमाएँ केवल मानसिक होती हैं, वास्तविक नहीं।”
आश्मा न्यौपाने के कार्यों को केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी सराहा गया है। उनके नाम कई ऐसे कीर्तिमान हैं जो पहली बार किसी नेपाली महिला ने हासिल किए हैं : International Women’s Gloria Award 2024: TIAF USA द्वारा इस प्रतिष्ठित सम्मान से उन्हें नवाजा गया। आदर्श नारी महिला सम्मान, भारत: महिला सशक्तिकरण और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें भारत में सम्मानित किया गया। Women Icon Award 2026: नेपाल का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराकर उन्होंने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। World Book of Records: वह नेपाल की एकमात्र महिला एंबेसडर हैं जिन्हें इस संस्था ने यह गौरव प्रदान किया है। विशेष रूप से, आश्मा न्यौपाने ने नेपाल का नाम Women International Record में ‘फर्स्ट लेडी’ के रूप में दर्ज कराया है, जो पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर आश्मा का जीवन और संदेश समाज के लिए एक दर्पण की तरह है। उनका मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल कागजों या भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक बदलाव के लिए हमें निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करना होगा : शिक्षा और कौशल: महिलाओं को समान शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के अवसर मिलना अनिवार्य है। निर्णय लेने की शक्ति: परिवार और समाज के महत्वपूर्ण निर्णयों में महिलाओं की बराबरी की भागीदारी हो। हिंसा का अंत: समाज को महिला विरोधी हिंसा और भेदभाव से मुक्त करना ही सच्ची प्रगति है। सम्मान और मान्यता: महिलाओं की मेहनत और उनके योगदान को समाज में उचित सम्मान मिले।
आश्मा न्यौपाने की कहानी हमें याद दिलाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, मेहनत और आत्मविश्वास से हर बाधा को पार किया जा सकता है। नेपाल में महिला सशक्तिकरण के इस दौर में आश्मा जैसी महिलाएं समाज के समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं। आइए, इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने आसपास की ‘आश्मा’ को पहचानेंगे और उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग करेंगे।



