अभियुक्त की ओर से न्यायालय में अधिवक्ता पारस नाथ चौबे व अनिल कुमार यादव ने पक्ष रखा
वाराणसी। जनपद के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-02, वाराणसी नितिन पाण्डेय की अदालत के द्वारा अनैतिक व्यापार मामले के एक अभियुक्त इन्द्रजीत उर्फ गोलू पुत्र मीना राठौर निवासी ग्राम हाजीपुर थाना चोलापुर, जनपद वाराणसी को एक लाख रूपये का व्यक्तिगत बंधपत्र व समान धनराशि का एक प्रतिभू संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर तथा निम्न शर्तों की अण्डरटेकिंग दाखिल करने पर उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया गया है। वहीं अभियुक्त की ओर से न्यायालय में अधिवक्ता पारस नाथ चौबे व अनिल कुमार यादव ने पक्ष रखा।
मामले के सम्बन्ध में बताया गया कि जनपद के थाना चितईपुर में दर्ज मुअसं. 127/2025 धारा-3, 4, 5, 6, 7 अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत अभियुक्त इन्द्रजीत उर्फ गोलू पर दर्ज किया गया था। जिसमें अभियुक्त की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जमानत प्रार्थना पत्र में अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में बताते हुए कथन किया गया है कि प्रार्थी/अभियुक्त की तरफ से यह प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र वास्ते सुनवाई/निस्तारण के लिए समक्ष प्रस्तुत की गई है। इस जमानत प्रार्थना पत्र के अतिरिक्त उक्त अपराध में प्रार्थी/अभियुक्त की कोई अन्य जमानत प्रार्थना पत्र माननीय उच्च न्यायलय, इलाहाबाद में या अन्य किसी सक्षम न्यायालय में न तो लम्बित है और न ही निस्तारित की गई है।
जमानत प्रार्थना पत्र में अभियोजन कथानक को अंकित करते हुए अगेतर कथन किया गया है कि उक्त अपराध में अभियुक्त को गलत एवं फर्जी ढंग से आरोपित कर अभियुक्त बना दिया गया है, जबकि प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा किसी प्रकार का कोई अपराध कारित नहीं किया गया है। प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा किसी भी अनैतिक देह व्यापार जैसी घटना को कारित नहीं किया गया है. न ही किसी भी प्रकार से कोई लेना-देना है. प्रार्थी/अभियुक्त का उक्त कथित घटना से किसी भी प्रकार का कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वास्ता सरोकार नहीं है। प्रार्थी/अभियुक्त को उक्त घटना में पुलिस द्वारा महज एक साजिश के तहत बिल्कुल झूठा फंसा दिया गया है और झूठा कहानी बनाकर जबरदस्ती अभियुक्त बना दिया गया है, प्रार्थी/अभियुक्त कथित घटनास्थल पर सफाई कर्मचारी के रूप में नियुक्त था। जो सुबह 08 से 10 व रात्रि 10 से 12 बजे 500/- रुपया के रोजमर्रा पर सफाई का कार्य करता है, उक्त घटना में प्रार्थी/अभियुक्त के पास से कोई भी अनैतिक सामान बरामद नहीं हुआ है।
पुलिस द्वारा जबरिया बयान दिलवा गया है, जो कि कानूनन मान्य नहीं है, इस प्रकार प्रार्थी/अभियुक्त के ऊपर उपरोक्त धाराओं में कोई भी अपराध नहीं बनता है और सभी धारायें सात साल के अंदर में और जमानतीय प्रकृति की है। एक अपराध की सभी धाराये विचारण न्यायालय द्वारा परीक्षणीय है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित आदेश सत्येन्द्र कुमार अंटिल बनाम सीबीआई से जमानत योग्य है। एक अचित घटना में प्रार्थी/अभियुक्त खिलाफ जनता का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। प्रार्थी/अभियुक्त का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। प्रार्थी/अभियुक्त उता कथित घटना में दिनांक 05.08.2025 में जेल में निरूद्ध है।
प्रार्थी/अभियुक्त उक्त अपराध में उचित जमानत व मुचलका दाखिल करने में सक्षम है। उपरोक्त परिस्थिति में प्रार्थी अभियुक्त को उचित जमानत मुचलका पर रिहा किया जाना आवश्यक एवं न्यायसंगत है। विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कथन किया गया कि प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा कारित अपराध गम्भीर प्रकृति का है। ऐसे में जमानत आवेदन निरस्त किया जाये।
वहीं दोनो पक्षों की तर्क को सुनने व पत्रावलियों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी/अभियुक्त इन्द्रजीत उर्फ गोलू की ओर से मु0अ0सं0-127/2025. अंतर्गत धारा-3, 4, 5, 6, 7 अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम थाना-चितईपुर, जिला वाराणसी के प्रकरण में प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है। प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा रू० 1,00,000/- (एक लाख रूपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र व समान धनराशि का एक प्रतिभू संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर तथा निम्न शर्तों की अण्डरटेकिंग दाखिल करने पर उसे जमानत पर रिहा किया जाये।




