वाराणसी: पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी को एक बड़ी सफलता मिली है। कपसेठी थाना पुलिस ने एक अंतरजनपदीय नकबजन गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। इन चोरों के पास से ₹1,52,200/- नकद और करीब ₹2.50 लाख मूल्य के जेवरात बरामद किए गए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हुई चोरी की घटनाओं का खुलासा हो गया है।
बरामदगी और आगे की जांच – पुलिस ने पकड़े गए चोरों के पास से बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के टप्स, मंगलसूत्र, चांदी के पायल, करधनी, बिछिया और अन्य जेवरात बरामद किए हैं। पूछताछ में सुभाष ने बताया कि इस चोरी में उसके चार और साथी शामिल थे, जिनमें से तीन को जौनपुर पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अब चौथे फरार आरोपी लालजी उर्फ राजकुमार की तलाश कर रही है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों को जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला? – यह मामला 29/30 अगस्त 2025 की रात का है, जब कपसेठी थाना क्षेत्र के सरावां गांव में एक घर में सेंध लगाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया था। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया, जिसने फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम की मदद से घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया।
कैसे पकड़े गए अपराधी ? – पुलिस ने मुखबिरों और गोपनीय सूचनाओं पर लगातार काम किया। इसी दौरान आज, 12 सितंबर 2025 को पुलिस ने सुभाष बनवासी और श्यामवृज बनवासी नामक दो अभियुक्तों को बाहरी नाला पुलिया के पास से धर दबोचा। पूछताछ में पता चला कि ये दोनों एक घुमंतू गिरोह से संबंध रखते हैं, जो चोरी के लिए कई जिलों में घूमता रहता है।
चोरों का शातिर तरीका – पुलिस के अनुसार, ये चोर इतने शातिर हैं कि अपनी पहचान छुपाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते थे।
- मोबाइल का प्रयोग नहीं करते: ये लोग अपनी लोकेशन पुलिस को पता न चले इसलिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे।
- सड़क से दूर रहते थे: ये मुख्य सड़कों और हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों से यात्रा नहीं करते थे, जिससे सीसीटीवी कैमरों से बच सकें।
- ट्रेन से सफर: वे अक्सर रेलवे स्टेशन के पास ठहरते और पैसेंजर ट्रेनों से यात्रा करते थे, ताकि कोई उन पर शक न करे।
- रहने की कोई जगह नहीं: इनका कोई स्थायी पता नहीं था और वे लगातार जगह बदलते रहते थे, जिससे पुलिस के लिए उन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल था।
- चोरी का सामान छिपाना: चोरी करने के बाद ये लोग सामान को अपने रिश्तेदारों या सुरक्षित जगहों पर छिपा देते थे और आम लोगों की तरह व्यवहार करते थे।




