आयुष्मान कार्ड से आंख का इलाज न होने पर वाराणसी के 80 साल के बुजुर्ग दम्पति ने प्रधानमंत्री कार्यालय में गुहार लगाई। समाज सेवी सुबेदार यादव ने आयुष्मान कार्ड में संशोधन की मांग करते हुए संसद भवन जाने की चेतावनी दी है।

वाराणसी : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत का लाभ क्या वाकई जमीनी स्तर पर जरूरतमंदों को मिल पा रहा है? यह सवाल आज वाराणसी में तब खड़ा हो गया जब एक 80 साल के बुजुर्ग दम्पति आयुष्मान कार्ड से आंख का इलाज न होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) न्याय की गुहार लगाने पहुंचे। राजातालाब तहसील के ग्राम सभा अदमापुर महनाग निवासी समाज सेवी सुबेदार यादव अपने बुजुर्ग माता-पिता की समस्या को लेकर काफी आहत हैं।

क्या है पूरा मामला? – समाज सेवी सुबेदार यादव के माता-पिता, माता सोमारी देवी और पिता संग्राम यादव (80 वर्षीय बुजुर्ग दम्पति), स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषकर माता सोमारी देवी की बाईं आंख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है। जब सुबेदार यादव उन्हें लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे, तो पता चला कि रेटिना में खून जम गया है, जिसके लिए महंगे इंजेक्शन और लेजर ट्रीटमेंट की जरूरत है।

डॉक्टरों ने बताया कि एक इंजेक्शन की कीमत लगभग 20 हजार रुपये है और दो इंजेक्शन लगने अनिवार्य हैं। जब सुबेदार यादव ने आयुष्मान कार्ड से इलाज की बात की, तो अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर मना कर दिया कि सरकार ने इस बीमारी को आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं रखा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में पत्र सौंपते हुए सुबेदार यादव ने तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा:

“मेरे माता-पिता का आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन जब वह मुसीबत के समय काम ही नहीं आ रहा, तो ऐसे कार्ड का क्या फायदा? डॉक्टरों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड केवल मोतियाबिंद के ऑपरेशन या कुछ चुनिंदा सर्जरी के लिए ही मान्य है। गंभीर रेटिना समस्याओं के लिए बुजुर्ग अब किसके पास जाएंगे?”

समाज सेवी सुबेदार यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक शिकायती पत्र कार्यालय में जमा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि देश के लाखों बुजुर्गों की समस्या है। उन्होंने मांग की है कि आयुष्मान कार्ड में तत्काल संशोधन किया जाए ताकि रेटिना और अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज भी कैशलेस हो सके। अगर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह देश के लाखों बुजुर्गों के हक के लिए संसद भवन, नई दिल्ली तक मार्च करेंगे।

80 साल की उम्र में जब शरीर साथ छोड़ देता है, तब सरकार की योजनाएं ही एकमात्र सहारा होती हैं। आयुष्मान कार्ड से आंख का इलाज न होने पर जिस तरह से यह बुजुर्ग दम्पति पीएमओ कार्यालय पहुंचे हैं, उसने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। सुबेदार यादव का कहना है कि सरकार को बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए आयुष्मान कार्ड की सूची में बदलाव करना चाहिए।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *