वाराणसी में बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित दोषमुक्त। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव और संदीप यादव ने पक्ष रखा।

वाराणसी। बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित दोषमुक्त होने से एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहमियत सामने आई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) प्रियल शर्मा की अदालत ने दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के त्रिपुरा भैरवी निवासी विजय शंकर द्विवेदी उर्फ टिंकू को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप या स्वीकारोक्ति के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि ठोस और पुख्ता सबूत मौजूद न हों। बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित दोषमुक्त होने का यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी वसीम अंसारी ने 6 अप्रैल 2010 को भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 2 अप्रैल 2010 की रात करीब 11 बजे वह अपनी बाइक घर के सामने दरवाजे पर खड़ी कर सोने चला गया था। अगले दिन सुबह उठने पर उसकी बाइक गायब मिली। दो-तीन दिन तक खोजबीन करने के बाद जब बाइक का कोई सुराग नहीं मिला, तो पीड़ित ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की और मुखबिर की सूचना पर बहुआपुर तिराहे के पास से विजय शंकर द्विवेदी उर्फ टिंकू को कथित रूप से चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया।

पुलिस का दावा था कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने बाइक चोरी की बात स्वीकार की थी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में चार गवाहों को पेश किया गया। हालांकि, अदालत में विचारण के दौरान प्रस्तुत गवाहों के बयान और साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव और संदीप यादव ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा। परिणामस्वरूप, बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित दोषमुक्त कर दिया गया।

यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि न्याय व्यवस्था में केवल संदेह के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। बाइक चोरी और बरामदगी के मामले में आरोपित दोषमुक्त होने से यह संदेश गया है कि कानून में सबूत सबसे मजबूत कड़ी होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *