वाराणसी: पुलिस ने एक बड़े संगठित गौ-तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 25,000 रुपये के इनामी कुख्यात गौ-तस्कर गोविन्द सिंह को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक पुलिस मुठभेड़ के बाद हुई, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी। इस कार्रवाई को वाराणसी पुलिस की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, क्योंकि गोविन्द सिंह पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।

क्या है पूरा मामला? – पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गौ-तस्करी से जुड़े मामले में वांछित गोविन्द सिंह वाराणसी के रामेश्वर के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही बड़ागाँव और फूलपुर थाने की संयुक्त पुलिस टीम ने इलेक्ट्रॉनिक और मैनुअल सर्विलांस की मदद से आरोपी की तलाश शुरू कर दी।
पुलिस ने जब रामेश्वर के निकट वरुणा पुल के पास दबिश दी, तो आरोपी गोविन्द सिंह ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आत्मरक्षा के लिए गोली चलाई, जो गोविन्द सिंह के पैर में लगी। घायल अवस्था में उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आरोपी के पास से एक देसी तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस भी मिला है।
संगठित गौ-तस्करी नेटवर्क का खुलासा – पूछताछ के दौरान गोविन्द सिंह ने एक अंतर्राज्यीय गौ-तस्करी नेटवर्क के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारी दी। यह नेटवर्क न सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैला हुआ है, बल्कि इसकी जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल तक भी हैं।
इस नेटवर्क में अलग-अलग स्तरों पर लोग शामिल हैं :
- व्यापारी (पहला स्तर): ये लोग ₹500–600 में गायों को खरीदते या चोरी करते हैं और उन्हें बिहार भेज देते हैं।
- व्यापारी (दूसरा स्तर): बिहार के पशु मेलों से इन गायों को खरीदकर आगे बंगाल भेजते हैं, जहाँ इनकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
- ट्रांसपोर्टर: ये लोग गायों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए वाहनों का इंतजाम करते हैं।
- चिंगड़ा: इनका काम रास्ते में पुलिस चेकिंग या नाके पर गाड़ियों को सुरक्षित निकालना होता है।
गोविन्द सिंह ने खुद कबूल किया कि उसने इस धंधे की शुरुआत एक “स्पॉटर” के तौर पर की थी, यानी वह गाड़ियों से आगे-आगे चलकर पुलिस की जानकारी देता था। धीरे-धीरे उसने खुद एक ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभाना शुरू कर दिया और अपना नेटवर्क फैला लिया। उसने बताया कि उत्तर प्रदेश से खरीदी गई गायें बिहार में ₹10,000 तक में बिकती हैं और बंगाल में इनकी कीमत और भी बढ़ जाती है।
पुलिस का अभियान जारी – गोमती ज़ोन में पिछले कई महीनों से गौ-तस्करी के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत पहले भी बड़ागांव और फूलपुर पुलिस ने दो मुठभेड़ों में दो गौ-तस्करों को गिरफ्तार किया था। गोविन्द सिंह से मिली जानकारी के आधार पर इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य अपराधियों के नाम भी सामने आए हैं।
पुलिस ने साफ किया है कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। गोविन्द सिंह का भाई राजू सिंह भी एक गौ-तस्कर है और पहले से ही जेल में है।




