चौड़ीकरण की भेंट चढ़ रहे कारोबार, लाखों का नजराना देने वाले किराएदार अब बेघर होने को मजबूर, कहाँ गए ‘रहनुमा’?

वाराणसी: पूर्वांचल की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मंडियों में शुमार दालमण्डी के चौड़ीकरण (सड़क चौड़ीकरण) का मामला अब एक बड़े विरोधाभास और असंतोष का केंद्र बन गया है। एक तरफ जहां भवन मालिकों की किस्मत खुल गई है और उन्हें मुआवजे के रूप में “चांदी” हाथ लग रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं भवनों में सालों से दुकान चला रहे किराएदार दुकानदारों को घोर निराशा और “ठेंगा” मिल रहा है।

इस दोहरे मापदंड ने दुकानदारों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि उन्हें मुआवजे के नाम पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।

नजराना देकर ली थी दुकान, अब कोई सुनवाई नहीं – यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि दालमण्डी में कोई भी दुकान किराए पर लेने के लिए भवन मालिक को एक बड़ी रकम नजराने (पगड़ी) के रूप में दी जाती है। लाखों रुपये की यह रकम देने के बाद ही एक मासिक किराया निर्धारित होता है। सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि नजराने की इस मोटी रकम का कोई लिखित रिकॉर्ड या लिखा-पढ़ी नहीं होती।

कई दुकानदार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने परिवार का पेट पालने के लिए कर्ज लेकर यह नजराना दिया था। आज जब उनकी दुकान बुलडोजर की भेंट चढ़ने जा रही है, तो उनका कर्ज भी बाकी है और भविष्य अंधकारमय। उनकी दयनीय स्थिति का संज्ञान लेने वाला कोई नहीं है।

“कहाँ हैं दालमण्डी के रहनुमा?” – पीड़ित दुकानदारों का गुस्सा अब नेताओं और तथाकथित ‘रहनुमाओं’ पर फूट रहा है। कई दुकानदारों को यह कहते हुए सुना गया कि :

“आज कहाँ हैं वो लोग जो अपने आप को दालमण्डी और दुकानदारों का रहनुमा (संरक्षक) कहते थे? चाहे वो स्थानीय हों या किसी राजनीतिक दल से। ये वही लोग थे जो कहते थे कि अगर ध्वस्तिकरण हुआ तो सबसे पहले बुलडोजर का विरोध वो करेंगे।”

“ऐसा प्रतीत होता है कि योगी बाबा के बुलडोजर के डर से ये रहनुमा कहीं छिप गए हैं। आज हम दुकानदारों के लिए कोई लड़ने वाला नहीं बचा है।”

यह बयान दिखाता है कि संकट की इस घड़ी में दुकानदारों को अकेला छोड़ दिया गया है, और उनकी मेहनत की कमाई (नजराना) डूबने के कगार पर है।

रविवार को लक्ष्मी कटरा में बड़ी कार्रवाई – इस बीच, प्रशासन ने चौड़ीकरण की कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा मामले पर गौर करें तो रविवार (तारीख: 09/11/2025) को दालमण्डी के लक्ष्मी कटरा में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिन सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई शाम लगभग 6 बजे शुरू हुई। भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की बड़ी टीम मौके पर पहुँची।

मौके पर पहुँचकर संबंधित 13 दुकानदारों को तत्काल दुकानें खाली करने का आदेश दिया गया, जिसके बाद ध्वस्तिकरण की कार्रवाई शुरू हुई। कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों के साथ विवाद की खबरें भी सामने आईं, लेकिन भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के चलते कानून व्यवस्था बनी रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

इस चौड़ीकरण ने दालमण्डी के दुकानदारों के जीवन में भारी उथल-पुथल ला दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इन लाखों रुपये का नजराना खो चुके किराएदारों के लिए कोई समाधान का रास्ता निकालती है या नहीं।

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