पूर्व सांसद धनंजय सिंह के अधिवक्ता शशिकांत राय चुन्ना ने बताया कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे
वाराणसी: कैंट थाने के गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में शुक्रवार को अपर जिला जज (त्रयोदश) सुशील खरवार की अदालत ने चार आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। ये आरोपित थे—संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेन्द्र सिंह बबलू। कोर्ट के इस फैसले के बाद, पूर्व सांसद धनंजय सिंह के अधिवक्ता शशिकांत राय चुन्ना ने बताया कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
क्या था पूरा मामला? – यह मामला 2002 का है, जब पूर्व सांसद और तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह पर जानलेवा हमला किया गया था। 4 अक्टूबर 2002 को धनंजय सिंह अपने कुछ साथियों के साथ सफारी गाड़ी से जौनपुर लौट रहे थे। वे जैसे ही कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर इलाके में स्थित टकसाल सिनेमा के पास पहुंचे, अचानक बोलेरो गाड़ी से अभय सिंह और उनके 4-5 साथी उतरे और धनंजय सिंह पर गोलियां चला दीं। इस घटना में धनंजय सिंह, उनका गनर, ड्राइवर और अन्य लोग घायल हो गए।
गोलियों की आवाज से आसपास भगदड़ मच गई, और मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को सिंह मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अभय सिंह समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जिसमें गैंगस्टर एक्ट भी शामिल था।
गैंगस्टर एक्ट में मुख्य अभियुक्त का नाम बदलने पर बरी हुए आरोपित – इस पूरे मामले में पुलिस ने बाहुबली विधायक अभय सिंह को मुख्य आरोपी माना था, लेकिन आरोपितों के वकील शशिकांत राय चुन्ना का कहना है कि गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह का नाम इस मामले में गलत तरीके से बाहर किया गया था। उनके अनुसार, मामला दूसरे थाने से जांच किया गया था और जांच अधिकारी अभय सिंह पर कार्रवाई करने के बजाय उनके पक्ष में काम कर रहे थे, जिससे अभय सिंह पर 169 की कार्रवाई कर एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई थी।
चुन्ना ने कहा कि जब मुख्य अभियुक्त का नाम केस से हटा दिया गया, तो अन्य आरोपितों का नाम इस मामले में कोई मायने नहीं रखता था। इसलिए सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया।
धनंजय सिंह की कानूनी लड़ाई जारी – पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने इस फैसले पर असंतोष व्यक्त किया और अपनी ओर से बयान दिया कि वह उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उनका कहना था कि गैंगस्टर एक्ट का यह मामला गोसाईगंज के बाहुबली विधायक अभय सिंह के खिलाफ था, लेकिन पुलिस ने राजनीतिक दबाव के कारण मामले की सही तरीके से जांच नहीं की।
धनंजय सिंह के अधिवक्ता ने बताया कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब समाजवादी पार्टी के विधायक राजा भैया और तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह सरकार के विरोध में थे, तब उन्हें जानबूझकर जेल में डाल दिया गया था, जिससे वे इस मामले में पैरवी नहीं कर पाए थे।
अभी भी जारी है हाईकोर्ट की सुनवाई – इस मामले में अब भी उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। धनंजय सिंह ने पहले ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनका आरोप था कि अभय सिंह का नाम गलत तरीके से इस केस से बाहर किया गया है। इस याचिका की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की गई है, जब अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
वाराणसी के इस गैंगस्टर एक्ट मामले में आरोपितों को राहत मिली है, लेकिन इस फैसले के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह और उनके वकील का कहना है कि यह फैसला राजनीति से प्रेरित था और वे अब हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद करते हैं।




