ग्वालियर। शिक्षा के मंदिर में जहाँ ज्ञान का प्रकाश फैलना चाहिए, वहीं अब ख़ौफ़ का साया मंडरा रहा है। ग्वालियर के माधव विधि महाविद्यालय से एक बेहद disturbing (परेशान करने वाली) घटना सामने आई है, जिसने महिला सुरक्षा और शिक्षण संस्थानों के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, एक एकतरफ़ा प्यार में पागल छात्र ने महाविद्यालय की एक 40 वर्षीय महिला सहायक प्राध्यापक को सरेराह एसिड अटैक (तेजाब से हमला) करने की घिनौनी धमकी दी।

दोस्ती का दबाव, फिर सनक – पीड़ित महिला मुरार क्षेत्र की निवासी हैं और नई सड़क स्थित माधव विधि महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। आरोपी छात्र का नाम दुष्यंत सागर है, जो शिवपुरी का रहने वाला है और ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में किराए पर रहकर कानून की पढ़ाई कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, दुष्यंत सागर लंबे समय से प्राध्यापक पर दोस्ती करने का दबाव बना रहा था। महिला के बार-बार मना करने के बावजूद, छात्र का पीछा करना और राह रोकना बंद नहीं हुआ। इस मानसिक उत्पीड़न से महिला पहले ही गुज़र रही थीं, लेकिन बीते दिन आरोपी ने सारी हदें पार कर दीं।

घर से महज़ 100 कदम दूर की धमकी – सोमवार को जब महिला महाविद्यालय से अपने घर लौट रही थीं, तो छात्र दुष्यंत सागर ने उनका पीछा किया। घर से महज़ 100 कदम की दूरी पर उसने महिला को रोक लिया और न सिर्फ़ डराया, बल्कि सीधे-सीधे उन पर तेजाब से हमला करने की जघन्य धमकी दे डाली।

किसी तरह महिला सुरक्षित अपने घर पहुँचीं। इसके बाद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपने परिवार के साथ मुरार थाना पहुंचकर छात्र के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और चिंता – मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुरार थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी छात्र दुष्यंत सागर को हिरासत में ले लिया है और उसके ख़िलाफ़ FIR (प्राथमिकी) दर्ज़ कर ली है। पीड़िता ने पुलिस से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन लिया है।

सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल – यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। शैक्षणिक संस्थानों का माहौल: स्थानीय लोगों और शिक्षकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं छात्र-शिक्षक के बीच बढ़ते तनाव और सुरक्षा के अभाव को दर्शाती हैं। क्या शिक्षा के परिसर भी अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रहे? मानसिक असंतुलन और परामर्श: आरोपी छात्र का यह व्यवहार मानसिक रूप से असंतुलित होने का संकेत देता है। शिक्षण संस्थानों में छात्रों की निगरानी और उचित परामर्श (Counselling) की कमी गंभीर परिणामों को जन्म दे सकती है। कानून का डर: समाज में एसिड अटैक जैसी घिनौनी धमकियाँ देना दर्शाता है कि ऐसे अपराधियों में कानून का डर कम हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में तेजी और सख़्ती से कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में कोई महिला इस तरह के उत्पीड़न का शिकार न हो।

    पुलिस और प्रशासन, दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक और छात्र दोनों ही एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल में अपना काम कर सकें।

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