अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और मुकेश सिंह ने पक्ष रखा
वाराणसी : पुरानी रंजिश के चलते हुए जानलेवा हमले के मामले में सगे भाइयों समेत पांच आरोपियों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने भीषमपुर, कपसेठी निवासी रविन्द्र कुमार सिंह, उनके भाई अरविंद कुमार सिंह, विशाल सिंह, उनके भाई आशुतोष सिंह और पीयूष सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। इन सभी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।
क्या था मामला? – अभियोजन पक्ष के अनुसार, भीषमपुर, कपसेठी निवासी किशन सिंह ने कपसेठी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वादी किशन सिंह ने बताया था कि उनके बड़े भाई विकास सिंह अपने पैतृक घर से अपने आवास तख्खू की बौली आ रहे थे। जैसे ही वे तख्खू की बौली गेट पर पहुंचे, रविन्द्र कुमार सिंह, उनके भाई अरविंद कुमार सिंह के साथ विशाल सिंह, उनके भाई आशुतोष सिंह और पीयूष सिंह ने उनकी गाड़ी रोक ली।
जैसे ही विकास सिंह गाड़ी से उतरे, रविन्द्र कुमार सिंह (पुत्र देववंश सिंह), विशाल सिंह (पुत्र रविन्द्र सिंह), आशुतोष सिंह (पुत्र रविन्द्र कुमार सिंह), अरबिन्द कुमार सिंह (पुत्र देववंश सिंह) और पीयूष सिंह उर्फ रिंकू (पुत्र अरबिन्द कुमार सिंह) ने एकजूट होकर गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से विकास सिंह के सिर पर लाठी और रॉड से गंभीर प्रहार किए, जिससे वह बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े।
किशन सिंह का आरोप है कि सड़क पर गिरने के बाद भी हमलावर कहते रहे कि “इसको जान से मार दो, बचने न पाये।” जब किशन सिंह ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो हमलावरों ने उन्हें भी मारा और कहा कि “चले जाओ नहीं तो जान से मार देंगे।” इसी बीच शोर सुनकर नीरज कुमार सिंह और सुबाष सिंह ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद हमलावर गालियां देते हुए और जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से भाग निकले।
किशन सिंह ने बाद में अन्य लोगों की मदद से अपने भाई को उपचार के लिए शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
बचाव पक्ष की दलीलें – इस मामले में अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और मुकेश सिंह ने पक्ष रखा। उनकी दलीलों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।





