वाराणसी: आज बनारस दीवानी कचहरी में एक सुकून भरा दिन रहा, जहाँ तीन अलग-अलग मामलों को मध्यस्थता (Mediation) के ज़रिए सुलझाया गया। यह दिखाता है कि कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्करों से बेहतर आपसी सहमति और बातचीत से विवादों को खत्म करना कितना कारगर हो सकता है।

आज मध्यस्थ पंडित धीरेन्द्र नाथ शर्मा की मौजूदगी में तीन मामलों का निपटारा हुआ। इन मामलों में दो पति-पत्नी के बीच के विवाद थे और एक चेक बाउंस का मामला था।

1. पहला मामला: स्वीटी और राहुल की सुलह – पहला मामला स्वीटी कुमारी और राहुल शर्मा के बीच था। दोनों पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाया गया। यह दिखाता है कि कई बार बस सही मंच और सही व्यक्ति की ज़रूरत होती है, जहाँ बैठकर लोग अपने मतभेदों को भुलाकर एक नई शुरुआत कर सकें।

2. दूसरा मामला: मधु और विजय का समझौता – दूसरा मामला लेक्चरर मधु सोनकर और विजय सोनकर का था। इस मामले में भी पति-पत्नी के बीच के तनाव को आपसी सहमति से खत्म किया गया। Mediation का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें दोनों पक्ष अपनी बात खुलकर रख पाते हैं और एक ऐसा समाधान निकलता है, जिससे दोनों संतुष्ट हों।

3. तीसरा मामला: चेक अनादर का निपटारा – तीसरा और सबसे ख़ास मामला सुमन सिंह और प्रमोद कौशल के बीच था। यह मामला चेक बाउंस का था, जो कोर्ट ने Mediation के लिए भेजा था। लंबी बातचीत के बाद, दोनों पक्षों में सहमति बनी कि प्रमोद कौशल, सुमन सिंह को फरवरी 2026 तक हर महीने किस्तों में 2 लाख 62 हजार रुपए का भुगतान करेंगे। इस समझौते के बाद, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और मामला खत्म हो गया।

इस पूरे प्रोसेस में ज़िला विधिक सहायता केंद्र के अपर ज़िला जज और सचिव मनोज कुमार ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई। उनके साथ-साथ सभी पक्ष और उनके वकील भी मौजूद थे।

पंडित धीरेन्द्र नाथ शर्मा, जो कि बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी हैं, ने इस कामयाबी का श्रेय सभी पक्षों की समझदारी और सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि “Mediation का उद्देश्य सिर्फ केस खत्म करना नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ना है।”

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