वाराणसी: काशी, जिसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है, यहां मोक्ष की चाह में केवल लोग ही नहीं आते, बल्कि अपने पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध के लिए भी आते हैं। पिशाचमोचन से लेकर गंगा के घाटों तक, पूरे पखवाड़े पितरों के प्रति श्रद्धा का भाव बना रहता है। किन्नर महामंडलेश्वर भी किन्नरों के पुरखों का यहीं त्रिपिंडी श्राद्ध करती हैं, तो वहीं सामाजिक संगठन भी कोख में मार दी गई अजन्मी बच्चियों के निमित्त तर्पण करते हैं।
इस वर्ष का अंतिम और सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को पड़ रहा है। वहीं पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, उनकी पूजा-आराधना और तर्पण-अर्पण के विधान भी इसी दिन से शुरू हो गए। पूर्णिमा का श्राद्ध भी इसी दिन किया गया। मातृकुल के पितरों यानी नाना-नानी आदि का तर्पण और श्राद्ध अगले दिन होता है।

श्राद्ध कर्म पर चंद्रग्रहण का असर नहीं – काशी के विद्वानों का कहना है कि श्राद्ध कर्म पर चंद्रग्रहण के सूतक का कोई प्रभाव नहीं होता। श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री और बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, चंद्रग्रहण या उसके सूतक का असर पितृ पक्ष या श्राद्ध कर्म पर नहीं पड़ता। इस बार खग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है, जो पूर्ण चंद्रग्रहण से भी बड़ा होता है। यह चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेता है और आकाश के कुछ हिस्से को भी आच्छादित कर लेता है, इसीलिए इसे खग्रास चंद्रग्रहण कहते हैं। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है।
ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष पांडेय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि सूतक या ग्रहण काल में श्राद्ध कर्म का कहीं भी निषेध नहीं किया गया है। वैसे तो इस बार सूतक दोपहर 12:57 बजे से लग रहा है और श्राद्ध कर्म पूर्वाह्न में ही कर लिए जाते हैं, लेकिन यदि कभी ग्रहण या सूतक पूर्वाह्नव्यापी हो तो भी श्राद्ध कर्म पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
ग्रहण के कारण मंदिरों के पट रहेंगे बंद – चंद्रग्रहण के कारण काशी के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। विश्वनाथ मंदिर के कपाट लगभग दो घंटे पहले शाम 7:30 बजे बंद हो जाएंगे। इस दौरान संध्या आरती शाम 4 बजे, शृंगार भोग आरती शाम 5:30 बजे और शयन आरती शाम 7 बजे होगी। अन्नपूर्णा मंदिर के पट भी शाम 7:30 बजे बंद होंगे। इसके अलावा, संकट मोचन मंदिर, दुर्गाकुंड मंदिर, मार्केंडेय महादेव और रामेश्वर महादेव मंदिर भी दोपहर में बंद होने के बाद अगले दिन भोर में ही खुलेंगे।




