varanasi news: वाराणसी: घरौनी प्रमाण पत्र को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और चंदौली से सांसद वीरेन्द्र सिंह ने आज बड़ा मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को सांसद वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त, वाराणसी-मंडल से मुलाकात की और गरीबों, भूमिहीन और वंचित समाज को जल्द से जल्द घरौनी उपलब्ध कराने की मांग की।

नागरिकता साबित करने का संकट सांसद ने अपनी चिंता बताते हुए कहा कि वर्तमान में मुख्य चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूची का काम चल रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के दौरान, भूमिहीन नागरिकों के लिए अपनी नागरिकता साबित करना अत्यंत मुश्किल होगा।

सांसद वीरेन्द्र सिंह ने साफ किया, “यदि इन गरीब परिवारों को घरौनी (संपत्ति के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र) मिल जाता है, तो यह उनकी नागरिकता का वैध प्रमाण बनेगा। इससे वे अपने संवैधानिक मताधिकार से वंचित नहीं होंगे।”

“गरीबों को हक से वंचित करने की साजिश” सांसद ने अधिकारियों को बताया कि पिछली दिशा समिति वाराणसी की बैठक में यह जानकारी दी गई थी कि वाराणसी जनपद में जो गरीब परिवार कई पीढ़ियों से सरकारी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं, उन्हें मालिकाना हक दिया जा रहा है और घरौनी उपलब्ध कराई जा रही है।

इस पर सांसद ने आयुक्त से गुजारिश की कि यदि यह बात सच है, तो सरकार को तत्काल मंडल के सभी जिलों में इस नीति को लागू करने का स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए।

सांसद वीरेंद्र सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि: “गरीब, अतिपिछड़े, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक वर्ग के गरीबों को घरौनी से वंचित कर, उनकी नागरिकता संदिग्ध बनाने की साजिश रची जा रही है।”

उनका कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि उनके नाम मतदाता सूची और राशन कार्ड से हटाए जा सकें, और वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे 5 किलो राशन, पेंशन) और संविधान प्रदत्त आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाएं।

सपा की दो टूक चेतावनी सांसद ने भाजपा और आर.एस.एस. पर सोची-समझी रणनीति के तहत काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी विचारधारा के जनप्रतिनिधि, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में, इस साजिश को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

अंत में, सांसद वीरेन्द्र सिंह ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार शीघ्र घरौनी देने की प्रक्रिया शुरू नहीं करती, और SIR (मतदाता पुनरीक्षण) से पहले गरीबों को वैध मालिकाना हक का प्रमाण नहीं मिलता, तो सभी जनप्रतिनिधि मजबूर होकर चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का विरोध एवं बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।

    यह मांग साफ दर्शाती है कि घरौनी अब केवल एक संपत्ति प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि गरीबों की नागरिकता और संवैधानिक हकों को सुनिश्चित करने का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

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