न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडालालपुर वाराणसी ने धारा 137(2), 87, 65 BNS और 3/4 पॉक्सो एक्ट के एक मामले में किशोर की जमानत स्वीकार कर ली है। प्रधान मैजिस्ट्रेट सौम्या पांडे की पीठ ने पीड़िता के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर यह आदेश दिया।
आरोपी किशोर की ओर से न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड में वरिष्ठ अधिवक्ता रत्नेश्वर पाण्डेय व शुभेन्दु पाण्डेय ने पक्ष रखा।
वाराणसी: न्याय और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडालालपुर वाराणसी ने हाल ही में एक संवेदनशील मामले में किशोर अपचारी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह मामला थाना मण्डुवाडीह से संबंधित है, जिसमें किशोर पर गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्यवाही – यह मामला सरकार बनाम “X” (नाम परिवर्तित) का है, जो मु0अ0स0- 10/2026, मि0नं0- 68/2026 के तहत न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडालालपुर वाराणसी के समक्ष विचाराधीन था। किशोर पर धारा 137(2), 87, 65 बी०एन०एस० (BNS) और 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान बोर्ड की प्रधान मैजिस्ट्रेट सौम्या पांडे, सदस्य त्रयम्बक नाथ शुक्ला और आरती सेठ उपस्थित रहीं। माननीय उच्चतम न्यायालय के ‘शिल्पा मितल बनाम एन०सी०टी० दिल्ली’ मामले के निर्देशों का पालन करते हुए किशोर की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है।
अधिवक्ता की दलीलें और DPO आख्या – किशोर के अधिवक्ता रत्नेश्वर पाण्डेय व शुभेन्दु पाण्डेय ने तर्क दिया कि बालक को पहले ही विधि विवादित घोषित किया जा चुका है और वह निर्दोष है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना के समय किशोर की उम्र 16 वर्ष 9 माह थी और उसकी रिहाई से न्याय का उद्देश्य विफल हो सकता है।
न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडा लालपुर वाराणसी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) की आख्या पर भी गौर किया। रिपोर्ट के अनुसार: बालक राजकीय सम्प्रेक्षण गृह रामनगर में निरुद्ध था। वह कक्षा 12 का छात्र है और उसके पिता एक शिक्षक के साथ-साथ कृषि कार्य से जुड़े हैं। मामला एक प्रेम प्रसंग से जुड़ा था, जिसमें दोनों (किशोर और पीड़िता) घर छोड़कर चले गए थे।
पीड़िता के बयान ने पलटा मामला – इस केस में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पीड़िता ने धारा 183 बी०एन०एस०एस (BNSS) के तहत दिए गए बयानों में किशोर पर लगाए गए आरोपों से इनकार कर दिया। साथ ही, पीड़िता ने अपना मेडिकल परीक्षण कराने से भी मना कर दिया। इन तथ्यों को देखते हुए न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडालालपुर वाराणसी ने माना कि जमानत देने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
बोर्ड का अंतिम आदेश – तथ्यों और परिस्थितियों का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद, बोर्ड ने किशोर की जमानत स्वीकार कर ली। न्यायालय ने आदेश दिया कि किशोर को उसके संरक्षक (पिता) की सुपुर्दगी में दिया जाए। 75,000 रुपये की दो प्रतिभूति और उतनी ही धनराशि का निजी बंधपत्र जमा किया जाए। संरक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि किशोर किसी भी अविधिक गतिविधि में शामिल न हो और नियत तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित रहे।
न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी बडालालपुर वाराणसी का यह निर्णय किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 12 के उन प्रावधानों को पुख्ता करता है, जहाँ बालक के सुधार और उसके भविष्य को प्राथमिकता दी जाती है।




