वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन का जश्न उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बड़े ही खास अंदाज में मनाया गया। इस मौके पर शहर को ₹130 करोड़ की लागत से कुल 650 विकास कार्यों का तोहफा मिला, जिनका शिलान्यास और लोकार्पण एक साथ किया गया। इन परियोजनाओं में वाराणसी की पारंपरिक धरोहरों को सहेजने और आधुनिक विकास की गति को तेज करने पर खास जोर दिया गया है।

विकास और विरासत का संगम – नगर निगम द्वारा शुरू की गई इन योजनाओं में सड़क निर्माण, सीवरेज और पेयजल लाइनों का विस्तार, नए ट्यूबवेल, और शहरों के बाहरी हिस्सों में स्ट्रीट लाइट लगाने जैसे काम शामिल हैं। इन सबके बीच, सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप शहर के पौराणिक कुंडों और कुओं के पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान दिया गया है।

महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि पीएम मोदी हमेशा अपनी विरासत को संजोने की बात करते हैं, और इसी सोच पर काम करते हुए, नगर निगम ने पहली बार कुओं के जीर्णोद्धार के लिए ₹5 करोड़ का बजट तय किया है। उन्होंने बताया कि अब तक 513 तालाबों का पुनरुद्धार चल रहा है और इस अवसर पर 75 कुओं को पुनर्जीवित कर प्रधानमंत्री को भेंट के रूप में समर्पित किया गया है। महापौर ने यह भी कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 513 कुओं को पूरी तरह से फिर से जीवित कर दिया जाएगा।

शहर की सफाई और व्यवस्था पर खास फोकस – जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने इस अवसर पर कहा कि पीएम मोदी के जन्मदिन पर वाराणसी को कई नई योजनाओं की सौगात मिली है। शहर को एक साफ और सुंदर स्वरूप देने के लिए ठोस मलबा प्रसंस्करण केंद्र और कूड़ा निस्तारण के नए इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा, सड़कों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए भी विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि पुराने काशी क्षेत्र में ₹900 करोड़ की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनसे सीवरेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा।

बाढ़ के बाद भी बेहतर रही व्यवस्था – अधिकारियों ने बताया कि इस साल गंगा में पाँच बार बाढ़ आने के बावजूद, नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखा। आने वाले दिनों में छठ और देव दीपावली जैसे बड़े त्योहारों को देखते हुए सफाई अभियान को और तेज किया जाएगा। यह भी दावा किया गया कि इस साल शहर में अभी तक डेंगू का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, जो स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी के जन्मदिन का यह आयोजन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि काशी को विकास और विरासत के संतुलन के साथ आगे ले जाने की एक नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।

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