इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई रोक

यह महत्वपूर्ण जानकारी वाराणसी में राहुल गांधी के अधिवक्ता अनुज यादव ने दी

वाराणसी। अमेरिका में भारत के सिखों को लेकर दिए गए बयान के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और आदेश आने तक वाराणसी की निचली अदालत में चल रही पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

यह महत्वपूर्ण जानकारी वाराणसी में राहुल गांधी के अधिवक्ता अनुज यादव ने दी। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की और राहुल गांधी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। साथ ही, यह स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक हाईकोर्ट अपना अंतिम आदेश नहीं सुना देता, तब तक वाराणसी की निचली अदालत इस मामले में कोई भी कदम नहीं उठाएगी।

क्या है पूरा मामला? मामला पिछले साल सितंबर का है, जब राहुल गांधी अपनी अमेरिका यात्रा पर थे। आरोप है कि वहां उन्होंने एक बयान में कहा था कि “भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या एक सिख के रूप में पगड़ी बांधने, कड़ा पहनने और गुरुद्वारा जाने की अनुमति मिलेगी।”

इस बयान पर आपत्ति जताते हुए वाराणसी के सारनाथ स्थित तिलमापुर निवासी नागेश्वर मिश्र ने इसे देश में गृह युद्ध भड़काने की साजिश करार दिया था। उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ एक वाद दाखिल किया था।

अदालतों में ऐसे चला मामला

  1. शुरुआत में, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने इस मामले को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था।
  2. इस फैसले के खिलाफ वादी नागेश्वर मिश्र ने सत्र न्यायालय में एक निगरानी याचिका (रिवीजन पिटीशन) दायर की।
  3. सत्र न्यायालय ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली और निचली अदालत (अवर न्यायालय) को मामले की फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया।
  4. इसके बाद, 21 जुलाई 2025 को वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने अधीनस्थ न्यायालय को इस मुकदमे को आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी वाराणसी की विशेष अदालत के इसी 21 जुलाई के आदेश को राहुल गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अब हाईकोर्ट ने यह अंतरिम रोक लगाई है। इस रोक से राहुल गांधी को तत्काल बड़ी राहत मिली है। अब सभी की निगाहें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह तय होगा कि वाराणसी की अदालत में यह मुकदमा आगे चलेगा या नहीं।

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