वाराणसी : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत लोकसभा अध्यक्ष और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को ईमेल के माध्यम से भेजी गई है।
त्रिपाठी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने हाल के दिनों में सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की संवैधानिक संस्थाओं, खासकर निर्वाचन आयोग, के खिलाफ अशोभनीय, अपमानजनक और असंसदीय भाषा का उपयोग किया है।
शिकायत के अनुसार, राहुल गांधी ने बीते कुछ दिनों में कई बार प्रधानमंत्री को “वोट चोर” कहकर संबोधित किया।
- 7 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, उन्होंने कर्नाटक में मतदाता सूची में गड़बड़ी का हवाला देते हुए “वोट चोरी” का आरोप लगाया।
- 22 अगस्त 2025 को बिहार की एक जनसभा में उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री को “वोट चोर” कहा और ECI पर साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
- 27 अगस्त 2025 को मुजफ्फरपुर में हुई रैली में उन्होंने एक बार फिर चुनावों में “चोरी, डिलीट और जोड़-तोड़” के आरोपों को दोहराया।
शशांक शेखर त्रिपाठी का कहना है कि इस प्रकार की भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां, न केवल देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को चोट पहुँचाती हैं, बल्कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं।
त्रिपाठी ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि :
- राहुल गांधी द्वारा प्रयोग किए गए असंसदीय शब्दों को लोकसभा रिकॉर्ड से हटाया जाए।
- इस मामले को विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) को सौंपा जाए।
- राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का निर्देश दिया जाए।
- भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों को रोकने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से भी अनुरोध किया है कि वह ऐसे निराधार आरोपों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करे, जिससे संस्था की निष्पक्षता और अखंडता पर सवाल उठ रहे हैं।
बीएम ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा,
“एक अधिवक्ता और जागरूक नागरिक के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि मैं लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा करूं। सार्वजनिक जीवन में नेताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे भाषा और तथ्य दोनों में संयम बरतें। दुर्भाग्यवश, राहुल गांधी की हालिया टिप्पणियां इस मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।”
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि राजनीतिक बयानबाज़ी अब सिर्फ़ वाद-विवाद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी लपेटे में ले रही है। देखना होगा कि लोकसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं।
लेखक: बीएम ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता
स्रोत: अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति




