वाराणसी: कैंट थाना क्षेत्र के पप्पू यादव हत्याकांड में आखिर न्याय का सूरज उगा। सात साल बाद, बुधवार को वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (आ.व.अधि) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों- विनोद यादव और आशीष यादव को आजीवन कारावास की सजा दी है। अदालत ने दोनों पर ₹40,000 का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला सिर्फ एक कानूनी कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह उस परिवार के लिए एक बड़ी राहत है जिसने 2018 में अपने युवा सदस्य को खो दिया था।

2018 की वो दर्दनाक रात – मामला 1 नवंबर, 2018 का है। कैंट थाना क्षेत्र के खजुरी गोला में रहने वाले पप्पू यादव अपने घर लौटे ही थे। रात के करीब 11:30 बज रहे थे। वह चाय की दुकान से अपनी पल्सर बाइक पर सवार होकर आए थे। उनके बड़े भाई, वादी दयाराम यादव ने कैंट थाने में दर्ज कराई गई अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अचानक उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
जैसे ही वह हड़बड़ी में घर से बाहर निकले, देखा कि पप्पू खून से लथपथ जमीन पर पड़े हैं। यह मंजर किसी भी परिवार के लिए दिल दहला देने वाला था।

भागते देखे गए थे दोषी – दयाराम यादव ने अपनी शिकायत में बताया था कि इस भयानक घटना के तुरंत बाद, लोगों ने दो संदिग्धों को घटनास्थल से भागते हुए देखा। ये संदिग्ध जगतगंज तेलियाबाग निवासी विनोद यादव और खजुरी गोला निवासी आशीष यादव थे।
गंभीर रूप से घायल पप्पू को तत्काल सिंह मेडिकल हॉस्पिटल ले जाया गया। लेकिन उनकी हालत इतनी नाज़ुक थी कि उन्हें तुरंत ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। मगर, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ट्रॉमा सेंटर पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

साक्ष्यों और गवाहों ने दिलाई सज़ा – इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मुकेश श्रीवास्तव ने मजबूती से पैरवी की। लंबी सुनवाई चली। अदालत ने प्रस्तुत किए गए तमाम साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान से परखा। अंततः, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दोनों अभियुक्त – विनोद यादव और आशीष यादव – पप्पू यादव की हत्या के दोषी हैं।
अदालत का यह फैसला न सिर्फ मृतक पप्पू यादव की आत्मा को शांति देगा, बल्कि यह भी साबित करता है कि देर से ही सही, न्याय मिलता जरूर है। यह फैसला कानून के शासन पर जनता के विश्वास को और मजबूत करता है।




