वाराणसी के राजकीय क्वींस इंटर कालेज में हुआ जनपदीय कला समेकित शिक्षण शास्त्र प्रतियोगिता
वाराणसी: आज, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज में एक बेहद खास आयोजन हुआ जिसने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों को एक नया आयाम दिया। “समग्र शिक्षा” कार्यक्रम के तहत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप, भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक शानदार जनपदीय कला समेकित शिक्षण शास्त्र प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का नाम था ‘समृद्धि-2025’ और इसका मकसद था कला को शिक्षण का एक अभिन्न हिस्सा बनाना।
कला और शिक्षा का अद्भुत संगम – कार्यक्रम की शुरुआत बेहद पारंपरिक और सकारात्मक माहौल में हुई। विद्यालय के प्रधानाचार्य, सुमीत कुमार श्रीवास्तव, और कई विशिष्ट अतिथियों ने मिलकर दीप प्रज्ज्वलित किया और माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इन अतिथियों में अखिल भारतीय नाट्यकला परिषद के सचिव सलीम राजा, अशोक मिशन विद्यालय के निदेशक आलोक आनंद, सेवानिवृत्त अध्यापक नवीन कुमार मल्होत्रा और श्रीमती सरोज सिंह जैसे सम्मानित लोग शामिल थे।
जब कला बनी ज्ञान का माध्यम- इस अवसर पर, सभी का मार्गदर्शन करते हुए श्री सलीम राजा ने कहा, “कला सिर्फ समाज की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह मन और बुद्धि को संवारने का एक शक्तिशाली तरीका भी है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर ज्ञान को कला, नाटक, संगीत और नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए, तो सीखना न सिर्फ आसान बल्कि मजेदार भी हो जाएगा।
आलोक आनंद ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “कला, साहित्य और संगीत हमेशा से ही ज्ञान को रोचक तरीके से लोगों तक पहुँचाने का माध्यम रहे हैं। अगर अब हमारी औपचारिक शिक्षा भी इस रास्ते पर चल रही है, तो यह वाकई एक स्वागत योग्य कदम है।”
विद्यालय के प्रधानाचार्य, सुमीत कुमार श्रीवास्तव ने इस पहल को समाज के लिए एक महत्वपूर्ण दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ हमारी संस्कृति की जड़ों से जुड़ना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम की सफलता का श्रेय – इस प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज की सहायक अध्यापिका श्रीमती जया सिंह रहीं, जिनकी देख रेख में यह पूरा आयोजन सफल हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभा श्रीवास्तव ने अपनी मीठी वाणी से किया। इस खास मौके पर विद्यालय के कई शिक्षक-शिक्षिकाओं और आर्य महिला इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रतिभा यादव की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
‘समृद्धि-2025’ प्रतियोगिता यह दिखाती है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि कला और संस्कृति के साथ मिलकर यह और भी समृद्ध और प्रभावशाली बन सकती है। यह पहल निश्चित रूप से शिक्षा के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जगाती है।





