बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, संदीप कुमार यादव और संदीप यादव ने पक्ष रखा
चंदौली: सकलडीहा के तत्कालीन विधायक सुशील सिंह पर हमला, तोड़फोड़ और रास्ता रोकने के एक पुराने मामले में सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके भाई अनिल यादव को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अशोक कुमार की अदालत ने लोअर कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था। अब सपा विधायक और उनके भाई को इस मामले में दोषमुक्त कर दिया गया है।
क्या था मामला? – यह मामला 24 अक्टूबर 2015 का है. तत्कालीन सकलडीहा विधायक सुशील सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह रात करीब 9 बजे अपने विधानसभा क्षेत्र सकलडीहा के कावर गांव में अपने एक समर्थक की दुकान पर गए थे। उनके अनुसार, कुछ ही देर बाद पूर्व विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके भाई अनिल यादव अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ महड़ौरा-भूपौली-चहनियां रोड पर अपनी गाड़ियां आड़ी-तिरछी खड़ी कर दीं, जिससे रास्ता जाम हो गया।
सुशील सिंह ने आरोप लगाया था कि इसके बाद प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके समर्थक सड़क पर आकर हंगामा करने लगे, जिससे विवाद की स्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने तुरंत पुलिस उपाधीक्षक सकलडीहा को फोन पर सूचना दी। आरोप था कि इस दौरान पूर्व विधायक और उनके समर्थक सुशील सिंह और उनके समर्थकों से मारपीट करने पर आमादा हो गए और गाली-गलौज करने लगे। सुशील सिंह के अनुसार, वे वहां से निकलना चाह रहे थे, लेकिन सपा विधायक और उनके लोगों ने उनका रास्ता तीन घंटे तक बाधित रखा और वे उनकी हत्या करने की नीयत से आए थे। इस मामले में बलुआ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
लोअर कोर्ट का फैसला और उसके बाद की अपील – इसी मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/(एमपी-एमएलए कोर्ट) चंदौली की अदालत ने 24 मई 2023 को सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके भाई अनिल यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ सपा विधायक ने सत्र न्यायालय में अपील की थी।
बताते चले कि विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अशोक कुमार की अदालत ने सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके भाई अनिल यादव की दाखिल रिवीजन अर्जी पर सुनवाई की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट घटना के 21 घंटे बाद दर्ज की गई थी। साथ ही, विवेचक ने विवेचना के दौरान घटना स्थल के आस-पास के लोगों का बयान दर्ज नहीं किया। इन बातों के आधार पर अदालत ने माना कि यह घटना संदेहास्पद प्रतीत होती है।
अदालत ने कहा कि ऐसे में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/(एमपी-एमएलए कोर्ट) चंदौली की अदालत द्वारा 24 मई 2023 को दिया गया आदेश निरस्त कर सपा विधायक और उनके भाई को दोषमुक्त किया जाना न्यायोचित होगा। इस प्रकार, सपा विधायक की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें और उनके भाई को दोषमुक्त कर दिया गया।
सोमवार को दीवानी न्यायालय परिसर में वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अनुज यादव और विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’, संदीप कुमार यादव और संदीप यादव ने पक्ष रखा।





