प्रयागराज के माघ मेले में शुरू हुआ विवाद अब अदालती दहलीज तक जा पहुंचा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है, यह सनसनीखेज आरोप आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने लगाए हैं। इन आरोपों ने न केवल धार्मिक जगत को झकझोर दिया है, बल्कि कानूनी गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जो जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार हैं, ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में एक वाद दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है और गुरुकुल की आड़ में बाल उत्पीड़न किया जाता है।
शिकायतकर्ता ने कोर्ट में दो नाबालिग पीड़ितों को भी पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, जिसका जवाब उनके वकील ने 10 फरवरी को दाखिल कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी, जहाँ जज तय करेंगे कि FIR दर्ज की जाए या वाद को खारिज कर दिया जाए।
आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर वाद में बेहद चौंकाने वाले विवरण दिए गए हैं जिसमे बाल उत्पीड़न और यौन शोषण: आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है। पीड़ितों का कहना है कि “गुरु-सेवा” के नाम पर उनके साथ रात में यौन कुकर्म किया गया। यह कृत्य महाकुंभ 2025 से लेकर माघ मेला 2026 तक जारी रहने का दावा किया गया है। अवैध गतिविधियां: शिकायत में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।
शिविर में अवैध हथियार होने की आशंका और बच्चों से पालकी ढुलवाने जैसे श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं। आय से अधिक संपत्ति: आशुतोष महाराज ने मांग की है कि उनके पास आय से अधिक संपत्ति है, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही कई बैंक खातों और मुकुंदानंद नामक व्यक्ति की भूमिका की जांच की भी मांग की गई है।
यौन शोषण के आरोपों के अलावा, अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रशासन को गुमराह करने का भी आरोप है। शिकायत के अनुसार : वह खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताकर फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को भ्रामक पत्र भेजकर गुमराह किया जा रहा है। 24 जनवरी 2026 की तारीख वाले इन पत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
मुख्य बिंदु: आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि उन्होंने पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए न्यायिक सुरक्षा की मांग की है।
फिलहाल, अविमुक्तेश्वरानंद के खेमे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे छवि धूमिल करने की साजिश बताया है। 20 फरवरी को होने वाली सुनवाई बेहद अहम होगी। यदि कोर्ट को प्रथम दृष्टया सबूत मिलते हैं, तो अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए जा सकते हैं। धार्मिक जगत के दो बड़े चेहरों रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बढ़ती यह कानूनी जंग अब किस मोड़ पर मुड़ती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
नोट :- बीएम ब्रेकिंग न्यूज़ लगाये गए आरोपों की पुष्टि नहीं करता, यह समाचार विभिन्न श्रोतो से प्राप्त किया गया है।



