Varanasi News: वाराणसी के बहुचर्चित Soyepur Sarab Kand में 14 साल के लंबे इंतजार के बाद कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। जहरीली शराब पीने से हुई 28 लोगों की मौत के इस मामले में अदालत ने सभी 16 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। Soyepur Sarab Kand से जुड़े इस फैसले ने एक बार फिर कानूनी साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी पर चर्चा छेड़ दी है।

Soyepur Sarab Kand: कोर्ट ने दिया ‘संदेह का लाभ’

विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) सुशील कुमार खरवार की अदालत ने Soyepur Sarab Kand के मुख्य आरोपियों सहित कुल 16 लोगों को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके, जिसके कारण उन्हें ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देते हुए बरी किया जा रहा है।

दोषमुक्त होने वालों की सूची: बरी होने वालों में बचाऊ जायसवाल उर्फ विजय जायसवाल, राघवेंद्र उर्फ गबड़ू जायसवाल, सारिका गुप्ता, शिवभजन गुप्ता उर्फ बबलू, गोपाल राजभर उर्फ बिल्ली, राजकुमार जायसवाल, महेश जायसवाल, नवल चौहान, भोनू जायसवाल, अनिल पाण्डेय, संजय जायसवाल, विक्की उर्फ विकास जायसवाल, अल्लू उर्फ बब्लू जायसवाल, सुनील पाल चौहान, राहुल सिंह और राजेश प्रसाद गुप्ता शामिल हैं।

क्या था पूरा Soyepur Sarab Kand?

यह मामला 16 फरवरी 2010 का है, जिसने पूरे वाराणसी को झकझोर कर रख दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कैंट थाना क्षेत्र के सोयपुर गांव में एक दाह संस्कार से लौटने के बाद कई ग्रामीणों ने गोपाल, राजकुमार और महेश जायसवाल के यहां से शराब खरीदकर पी थी। आरोप था कि इस शराब में नवल चौहान, भोनू जायसवाल और अंबू देवी ने विषैला पदार्थ मिलाया था।

शराब पीने के कुछ ही घंटों बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते Soyepur Sarab Kand में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच गया। वादी दिनेश राजभर की तहरीर पर पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

14 साल चली कानूनी लड़ाई

Soyepur Sarab Kand के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश किए, लेकिन वे कोर्ट में आरोपों को साबित करने के लिए नाकाफी रहे। इस लंबी सुनवाई के दौरान आरोपी जवाहर लाल जायसवाल, अंबू देवी, शम्भू सिंह और महेंद्र कुमार जायसवाल की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।

आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव और संदीप यादव ने जोरदार पक्ष रखा और दलील दी कि उनके मुवक्किलों को गलत तरीके से फंसाया गया है।

एक गहरा जख्म है Soyepur Sarab Kand

वाराणसी के इतिहास में Soyepur Sarab Kand को एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है। हालांकि आज कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन उन 28 परिवारों के लिए न्याय का सवाल आज भी बना हुआ है जिन्होंने अपने अपनों को खोया था।

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