lucknow news: लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP)—के बीच चल रहे ‘होर्डिंग वॉर’ का अखाड़ा बन गई है। यह कोल्ड वॉर शनिवार को शुरू हुआ था, जब शहर की प्रमुख सड़कों पर ‘आई लव योगी आदित्यनाथ’ और ‘आई लव बुलडोजर’ लिखे होर्डिंग्स दिखाई दिए थे, जिस पर दिनभर खूब चर्चा हुई।

लेकिन, आज यानी रविवार की सुबह, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी जोरदार पलटवार किया है। भाजपा के होर्डिंग्स के जवाब में, लखनऊ में अब ‘आई लव अखिलेश यादव’, ‘आई लव पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और ‘आई लव शिक्षा, विकास, रोजगार’ जैसे स्लोगन वाली होर्डिंग्स की भरमार हो गई है।

विवेक सिंह यादव और अवनींद्र यादव ने संभाला मोर्चा सपा के समर्थन में ये होर्डिंग्स सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव विवेक सिंह यादव और सपा के पूर्व प्रदेश सचिव अवनींद्र यादव की ओर से लगाई गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की आक्रामक पोस्टर पॉलिटिक्स का सीधा और तीखा जवाब माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक इसे दोनों दलों के बीच एक बार फिर से शुरू हुआ ‘होर्डिंग्स के माध्यम से कोल्ड वॉर’ बता रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है, पिछले कुछ समय से राजनीतिक पार्टियां सोशल मीडिया के साथ-साथ होर्डिंग्स और पोस्टर के जरिए एक-दूसरे को जवाब देने का यह तरीका खूब अपना रही हैं।

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद? – यह ताज़ा ‘होर्डिंग वॉर’ दरअसल एक बड़े विवाद की ही कड़ी है। इस पूरे मामले की जड़ 9 सितंबर को कानपुर में हुई एक घटना से जुड़ी है। कानपुर में बारावफात जुलूस के दौरान सार्वजनिक मार्ग पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर लगाए गए थे।

इस घटना के बाद पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और नौ नामजद सहित 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामला यहीं नहीं थमा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बयान दिया कि ‘आई लव मोहम्मद’ कहना कोई अपराध नहीं है। देखते ही देखते यह विवाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होता हुआ उत्तराखंड और कर्नाटक तक फैल गया, जहां विरोध-प्रदर्शन और पुलिस की सख्ती भी देखने को मिली।

अब सवाल यह है कि ‘आई लव मोहम्मद’ से शुरू हुआ यह भावनात्मक और धार्मिक विवाद, जब ‘आई लव योगी’ और ‘आई लव अखिलेश’ के राजनीतिक मुहावरे में बदल चुका है, तो क्या यह ‘होर्डिंग वॉर’ उत्तर प्रदेश की सियासत को कोई नई दिशा देगा, या सिर्फ एक तात्कालिक प्रचार का हिस्सा बनकर रह जाएगा? इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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