उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब इन कर्मचारियों की नौकरी एक साल की बजाय तीन साल की होगी और उनका मासिक वेतन भी करीब दोगुना बढ़कर ₹20,000 तक हो जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ के गठन को भी मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य इन कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और उन्हें उनका पूरा हक दिलाना है।

क्या-क्या बदलाव हुए?

  1. नौकरी की अवधि: अब तक आउटसोर्स कर्मचारियों का अनुबंध एक साल का होता था, लेकिन नई व्यवस्था में यह तीन साल का होगा, जिसके बाद इसे रिन्यू किया जा सकेगा।
  2. मानदेय में वृद्धि: न्यूनतम मानदेय लगभग ₹10,000 से बढ़कर ₹20,000 हो गया है। विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक की राशि अलग-अलग तय की गई है, जो ₹20,000 से ₹40,000 तक है।
  3. पारदर्शिता: आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन अब सीधे विभागों द्वारा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम द्वारा GeM पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।
  4. सुरक्षा और लाभ: कर्मचारियों को वेतन के अलावा पीएफ (Provident Fund) और ईएसआई (Employee State Insurance) की सुविधा भी मिलेगी। महिलाओं को मैटरनिटी लीव का भी लाभ दिया जाएगा।
  5. आरक्षण: नई व्यवस्था में एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को नियमानुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा।
  6. भर्ती प्रक्रिया: कर्मचारियों का चयन अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
  7. मृत्यु सहायता: सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए ₹15,000 की सहायता राशि दी जाएगी।
  8. क्यों उठाया गया यह कदम?

सरकार ने यह फैसला आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ होने वाली अनियमितताओं को खत्म करने के लिए लिया है। अक्सर यह शिकायत मिलती थी कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां कर्मचारियों को सरकार द्वारा स्वीकृत पूरा मानदेय नहीं देती थीं और न ही पीएफ-ईएसआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती थीं। इन समस्याओं को दूर करने और कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ही उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया गया है।

प्रमुख बिंदु जो कर्मचारी के हित में हैं :

  • 26 दिन की सेवा: कर्मचारियों से महीने में अधिकतम 26 दिन ही काम लिया जाएगा।
  • समय पर वेतन: वेतन सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में 1 से 5 तारीख तक भेज दिया जाएगा।
  • अनियमितता पर कार्रवाई: किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर एजेंसी के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई होगी।

यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न सिर्फ एक राहत है, बल्कि यह उनके भविष्य को भी सुरक्षित और बेहतर बनाएगी। सरकार का यह कदम कर्मचारी हितों की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

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