वाराणसी: शुक्रवार शाम को पूर्वांचल के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम विभाग ने पहले ही नवरात्रि के दौरान भारी बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन आंधी और बारिश का वेग इतना जबरदस्त था कि शनिवार सुबह नुकसान का मंजर देखकर इसकी तीव्रता का अंदाजा हुआ।
दुर्गा पूजा पंडालों को भारी नुकसान – नवरात्रि के उल्लास के बीच इस आंधी-बारिश ने सबसे ज्यादा असर दुर्गा पूजा के पंडालों पर डाला है। कई जगहों पर पंडाल नष्ट हो गए, जिससे आयोजकों को भारी नुकसान हुआ।

आजमगढ़ के बोंगरिया बाजार में नवयुवक पूजन समिति का पंडाल पूरी तरह गिर गया। हालांकि, आयोजकों ने राहत की सांस ली क्योंकि देवी मां की मूर्ति पर एक भी खरोंच नहीं आई। सुबह होते ही आयोजक मंडल गिरे हुए पंडाल को दोबारा ठीक करने में जुट गया। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में टिन शेड और पेड़ों की डालियाँ गिरने की खबरें हैं।
प्राचीन मंदिर को वज्रपात से क्षति – बारिश के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात) ने भी अपना कहर बरपाया। भदोही के गोपीगंज स्थित रामपुर गंगा घाट के प्राचीन शिव मंदिर पर देर रात वज्रपात हुआ। इससे मंदिर का शिखर और कुछ अन्य हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। मंदिर प्रशासन नुकसान का आकलन कर मरम्मत का काम शुरू करने की तैयारी में है।
वाराणसी में नदेसर स्थित अंधरा पुल के पास प्राचीन पीपल की डाल तेज आवाज़ के साथ ज़मीन पर आ गिरी। गनीमत रही कि बारिश और तेज़ हवा के कारण नीचे कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बिजली और रेल यातायात प्रभावित – आंधी-बारिश का असर बिजली आपूर्ति और रेलवे पर भी पड़ा। वज्रपात के कारण पूर्वांचल के कई इलाकों में ट्रांसफार्मर को व्यापक नुकसान पहुंचा। इसकी वजह से शनिवार सुबह तक कई जगहों पर बिजली की आपूर्ति दुरुस्त नहीं हो सकी।

रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरा: शिवपुर रेलवे स्टेशन के पास डाउन लाइन के समीप एक नीम का पेड़ गिर पड़ा। जौनपुर से आ रही 13308 किसान एक्सप्रेस के ड्राइवर ने सूझबूझ से ट्रेन धीमी कर स्टेशन अधीक्षक को सूचना दी। तत्काल रेलवे कर्मचारियों ने टहनियों को काटकर ट्रैक खाली कराया, जिससे ट्रेन सेवा बाधित होने से बच गई।
किसान की चिंता बढ़ी: धान की फसल लोट गई – बारिश ने खेती-किसानी पर मिश्रित असर डाला है, लेकिन किसानों की चिंताएँ बढ़ गई हैं। तेज आंधी के कारण कई जगहों पर खेतों में खड़ी धान की फसल लोट गई (गिर गई)। जौनपुर के किसान लल्लन निषाद ने बताया कि एक एकड़ के करीब फसल धराशाई हो गई है। ज़मीन पर गिरने से फसल में सड़ने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे किसानों की कमरतोड़ मेहनत पर पानी फिर गया है।
वहीं, जलजमाव वाले खेतों में सब्जियों की पौध को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में तैयार होने के कगार पर खड़ी धान की फसल को इस पानी से थोड़ी राहत भी मिली है। महंगे खाद, बीज और कड़ी मेहनत के बाद प्रकृति की इस मार ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।




