अदालत में वादी के अधिवक्ताओं अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और नितेश सिंह ने मजबूती से जमानत अर्जी का विरोध किया।

वाराणसी। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के एक सनसनीखेज मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी महिला विद्या देवी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। मिश्र पोखरा, लक्सा की रहने वाली विद्या देवी अब जेल में ही रहेंगी। अदालत में वादी के अधिवक्ताओं अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और नितेश सिंह ने मजबूती से जमानत अर्जी का विरोध किया।

क्या है पूरा मामला? – अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी सत्येन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने चेतगंज एसीपी को एक लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि मेसर्स नीलांबर ट्रैक्सिम एंड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी, जो 9 जून 1992 को पंजीकृत हुई थी, जिसका पंजीकृत कार्यालय वेस्ट बंगाल में है और हेड ऑफिस वाराणसी के ईश्वरगंगी, नाटी इमली में स्थित है। सत्येन्द्र कुमार श्रीवास्तव खुद इस कंपनी के मैनेजर हैं। उन्होंने बताया कि इस कंपनी में दो निदेशक हैं जिनके पास कंपनी के कोई शेयर नहीं हैं : कवलधारी यादव (मिश्र पोखरा, लक्सा, नियुक्ति तिथि: 5 जून 2019), अनिल कुमार श्रीवास्तव (ग्राम बागरा, कुदरा, जिला कैमूर, बिहार, नियुक्ति तिथि: 10 नवंबर 2021) कंपनी के दो बैंक खाते रामकटोरा स्थित यस बैंक शाखा में मौजूद हैं। एक खाता कंपनी के सामान्य संचालन के लिए है और दूसरा यस सिक्योरिटी लिमिटेड के साथ शेयरों के क्रय-विक्रय के लिए।

ऐसे हुई करोड़ों की धोखाधड़ी – शिकायत के मुताबिक, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कवलधारी यादव को इन दोनों खातों को कंपनी के हित में संचालित करने के लिए अधिकृत किया था। लेकिन, इसी दौरान कवलधारी यादव ने अपनी पत्नी विद्या देवी (जो वर्तमान आरोपी हैं) के साथ मिलकर सूर्य नारायण, आशीष तिवारी, मंदीप सिंह, हिमांशु शुक्ला, शादाब राजा, यस बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व अन्य कर्मचारियों, मेसर्स मैक्समोर पेमेंट डिजिटेक प्रा. लि., मेसर्स वैभव ट्रेडर्स, मेसर्स दिव्यांशी ब्यूटीपार्लर, नेहा बानो, मेसर्स दीप कलेक्शन, मो. आमिर और उमंग गौतम के साथ आपस में मिलीभगत कर ली। इन सभी ने मिलकर वादी की कंपनी के खाते से पूरे 5.02 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करते हुए निकाल लिए।

पुलिस कार्रवाई और अब आगे क्या? – इस मामले में पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और विद्या देवी को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया था। अब उनकी जमानत अर्जी खारिज होने के बाद, यह साफ हो गया है कि उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। इस हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि धोखाधड़ी के मामलों में न्यायपालिका कितनी गंभीर है।

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