बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने अदालत में पक्ष रखा।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश की वाराणसी कोर्ट से एक पुराने विवादित मामले में तीन आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। रास्ते के विवाद को लेकर घर में घुसकर महिलाओं के साथ गाली-गलौज और मारपीट करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और आरोप सिद्ध न होने पर अशोक यादव, राजेश यादव और लक्ष्मण यादव को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है।
यह पूरा विवाद वाराणसी के वरुणा ब्रिज इलाके का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वरुणा ब्रिज निवासी लालजी यादव ने 28 सितंबर 1996 को कैंट थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। लालजी का आरोप था कि वह काम के सिलसिले में घर से बाहर गया था, तभी रात्रि लगभग 8 बजे रास्ते के पुराने विवाद को लेकर कुछ लोग उनके दरवाजे पर चढ़ आए। आरोप के मुताबिक, अशोक यादव, राजेश यादव, भरत, लक्ष्मण, बाबू और धन्नू यादव हाथ में डंडा, हॉकी और कट्टा (रिवाल्वर) लेकर आए थे। उन्होंने घर की महिलाओं (मां और बहन) के साथ अभद्रता की और उन्हें मारा-पीटा। शोर सुनकर जब मोहल्ले के लोग इकट्ठा हुए, तब आरोपी वहां से भाग निकले।
मुकदमे के विचारण के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरोपितों को केवल आपसी रंजिश और रास्ते के विवाद के कारण इस मामले में घसीटा गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपितों के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं।
यह मामला साल 1996 से चल रहा था। लंबे समय तक चली इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान तीन आरोपितों—धन्नू यादव, पांचू यादव और भरत यादव की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ सुनवाई पहले ही समाप्त कर दी गई थी। शेष बचे तीन मुख्य आरोपितों अशोक यादव, राजेश यादव और लक्ष्मण यादव को कोर्ट ने अब बरी कर दिया है।







