वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और मुकेश सिंह ने पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा

वाराणसी: न्याय के मंदिर में अब जाकर एक पीड़ित महिला की गुहार सुनी गई है। मुकदमे की पुरानी दुश्मनी को लेकर एक महिला के घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और लूटपाट करने के मामले में आखिरकार अदालत ने बड़ागांव पुलिस को 13 नामजद और 6 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) वर्तिका शुभानंद की अदालत ने सुनाया है।

यह पूरा मामला इंसानियत और कानून, दोनों को शर्मसार करने वाला है। पीड़ित महिला ने अपने वकील के माध्यम से अदालत को बताया कि उनका परिवार गांव के ही कामरान से पुरानी रंजिश रखता है। इसी दुश्मनी के चलते 1 फरवरी 2024 को कामरान, कामिल और जमीन ने उसके बेटे साहुन अहमद को बेरहमी से पीटा था। इस घटना के बाद पीड़िता के पति मुनव्वर अली ने बड़ागांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

मगर, इस कानूनी कार्रवाई ने दुश्मनों की आग को और भड़का दिया। 3 अप्रैल 2025 को कामरान ने पीड़िता के पति को रोककर भद्दी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। इसकी शिकायत भी थाने में दर्ज कराई गई।

घर में घुसकर हमला और लूटपाट – फिर आया वो दिन, जिसने इस परिवार को हिलाकर रख दिया। 12 मई 2025 को पीड़िता का छोटा बेटा दानिश घर के पास क्रिकेट खेल रहा था। उसी दौरान बाबू नाऊ नाम के एक शख्स ने उसे खेलने से रोका और गाली-गलौज करने लगा। जब दानिश ने इसका विरोध किया, तो बाबू नाऊ के साथ कामरान, सैफ और साहिल भी आ गए और दानिश को पीटने लगे।

यह देखकर जब बड़ा भाई साहुन उसे बचाने आया तो हमलावरों ने दोनों भाइयों को दौड़ा लिया। डरकर दोनों भाई अपनी दुकान में भागे और शटर गिराने लगे। लेकिन हमलावर यहीं नहीं रुके। लाठी, डंडे, रॉड और चाकू लेकर आए आरोपियों ने रॉड से शटर तोड़कर दुकान में घुस गए। उन्होंने साहुन को बुरी तरह पीटा और दुकान में रखा डेढ़ लाख रुपये का सारा सामान तोड़ डाला।

जब मां अपने बेटों को बचाने के लिए आगे आईं, तो आरोपियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। यासीन ने उनके साथ अश्लील हरकतें कीं और उन्हें लगभग निर्वस्त्र कर दिया। सैफ ने उनके बाल खींचकर उखाड़ दिए। इसी दौरान कामरान ने उनके कान से सोने की बाली नोंच ली। साहिल, सलमान और यासीन ने जबरदस्ती गल्ले में रखे 45,000 रुपये लूट लिए।

पुलिस ने नहीं सुनी तो ली अदालत की शरण – इतनी भयावह घटना के बाद भी जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने कानून का दरवाजा खटखटाया और अदालत में अपनी आपबीती सुनाई। वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और मुकेश सिंह ने पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा।

अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और बड़ागांव पुलिस को तुरंत 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। यह घटना दिखाती है कि न्याय पाने के लिए अक्सर एक आम इंसान को कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। उम्मीद है कि अदालत के इस आदेश के बाद दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलेगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा।

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