कपसेठी मारपीट मामला में वाराणसी की अदालत ने अहम फैसला सुनाया। मुकदमे की रंजिश में हमले के आरोपों में पिता और दो पुत्रों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने पक्ष रखा।

वाराणसी से जुड़े कपसेठी मारपीट मामला में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता और उनके दो पुत्रों को दोषमुक्त कर दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) श्रीकांत गौरव की अदालत ने मुकदमे के विस्तृत विचारण के बाद आरोप सिद्ध न होने पर यह फैसला सुनाया। यह मामला जमीन विवाद और मुकदमे की पुरानी रंजिश से जुड़ा हुआ था, जिसे लेकर गंभीर मारपीट के आरोप लगाए गए थे। कपसेठी मारपीट मामला मड़ईया, कपसेठी निवासी परिवादी रामआसरे पटेल द्वारा दर्ज कराए गए परिवाद से जुड़ा है। परिवादी के अनुसार, आराजी संख्या 344 क, 345 और 335 उसके पिता के नाम दर्ज हैं। इन्हीं जमीनों को लेकर उपजिलाधिकारी सदर के यहां भूराजस्व अधिनियम की धारा-41 के तहत मामला विचाराधीन था। नापी के आदेश के बाद कानूनगो और लेखपाल द्वारा जमीन की नापी की गई थी, जिससे विवाद और गहराता चला गया।

परिवादी ने आरोप लगाया कि 13 जून 2012 को सुबह करीब 6 बजे विपक्षी पक्ष जमीन पर कब्जा करने पहुंचा और नापी के दौरान लगाए गए पत्थरों को उखाड़ने लगा। मना करने पर कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए लाठी, डंडा और चाकू से हमला किया गया। इस हमले में परिवादी, उसके भाई रामभरोसे और भाभी गीता देवी को गंभीर चोटें आने का दावा किया गया था। आरोप यह भी था कि गीता देवी का हाथ टूट गया। कपसेठी मारपीट मामला में परिवादी ने बताया कि कपसेठी थाने में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उसने अदालत का रुख किया। अदालत ने परिवाद दर्ज कर आरोपित जवाहिर, उसके पुत्र आनंद और अखिलेश को तलब किया।

लंबे समय तक चले विचारण के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहा। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। कपसेठी मारपीट मामला में आए इस फैसले को आरोपित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वहीं यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भूमि विवादों में आपराधिक आरोपों की जांच कितनी अहम भूमिका निभाती है।

करीब 13 साल पुराने कपसेठी मारपीट मामला में अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया कि केवल आरोपों के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। साक्ष्य और ठोस प्रमाण ही न्याय का आधार होते हैं।

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